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कुल्लू टुडे

विनोद महंत

हालांकि कुल्लू नगर परिषद के चुनाव में कांग्रेस और भाजपा 11 वार्ड में से केवल तीन-तीन सीट जीत पाई है।

लेकिन शर्मनाक स्थिति वीरवार को उसे समय सामने आई जब भाजपा के कुछ पार्षद ने कांग्रेस के आगे सरेंडर करते हुए उनके पार्षदों के साथ शपथ ग्रहण की।

जबकि उससे पहले भाजपा के कुछ पार्षदों ने अलग से शपथ ग्रहण की। मगर उसके बाद दो अलग-अलग मौकों पर हुई शपथ में कांग्रेस के पार्षदों के साथ भाजपा समर्थित कुछ पाषर्दों ने भी शपथ ली और दावा जताया कि वह सब एक हैं।

गौरतलब है कि वीरवार को हुए कुल्लू नगर परिषद पार्षदों के शपथ समारोह में पहले प्रदेश भाजपा के वरिष्ठ नेता राम सिंह की अगवाई में पांच पार्षदों ने शपथ ग्रहण की, जिसमें भाजपा समर्थित पार्षद भी शामिल रहे।

लेकिन शपथ ग्रहण समारोह के दूसरे सत्र में कांग्रेस के पार्षदों के साथ भाजपा समर्थित या यूं कहें कि भाजपा से संबंधित एक आजाद तथा दूसरे शुद्ध तौर पर भाजपा समर्थित पार्षद ने कांग्रेस समर्थित प्रत्याशियों के साथ शपथ ली। शपथ ग्रहण के बाद उन्होंने दावा जताया कि वह नगर परिषद की समस्याओं को लेकर एकजुट है।

हैरत इस बात की है कि कांग्रेस अपने बूते नगर परिषद अध्यक्ष पद हासिल नहीं कर पा रही थी, ऐसे में कांग्रेस ने भाजपा समर्थित पार्षदों के साथ हाथ मिला लिया।

जबकि भाजपा अक्सर इस बात का दावा करती रही है कि कांग्रेस पूरी तरह से भ्रष्ट है ऐसे में भाजपा कांग्रेस के साथ हाथ नहीं मिल सकती है, लेकिन नगर परिषद के शपथ ग्रहण समारोह में एक बात पूरी तरह से साफ हो गई की भाजपा और कांग्रेस में किसी तरह की भी पारदर्शिता नहीं है सत्ता व पद हथियाना के लिए दोनों पार्टियों किसी भी हद तक जा सकती है।

फिलहाल कुल्लू नगर परिषद के अध्यक्ष पद के चुनाव को लेकर जो समीकरण बन रहे हैं, निश्चित तौर पर वह राजनीतिक तौर पर पूरी तरह से जनादेश के खिलाफ साबित हो रहा है। क्योंकि पूरे प्रदेश में अभी तक किसी भी स्तर पर भाजपा या कांग्रेस में एक दूसरे के साथ किसी भी पद को हथियाना के लिए हाथ नहीं मिलाया है।

लेकिन कुल्लू के कांग्रेस विधायक सुंदर ठाकुर और भाजपा के नेता नगर परिषद पर अपना कब्जा जमाने के लिए आपस में एक दूसरे के साथ हाथ में डालने के लिए पूरी तरह से तैयार हो गए लगते हैं हालांकि यह भी तय माना जा रहा है कि नगर परिषद में अध्यक्ष पद पर कांग्रेस पार्षद ही असीन होगा।

गौरतलब है कि कुल्लू में नगर परिषद अध्यक्ष पद महिला के लिए आरक्षित है। ऐसे में यह भी चर्चा है कि कांग्रेस भाजपा के साथ हाथ मिलाने के बाद कांग्रेस समर्थित पार्षद कुब्जा ठाकुर को अध्यक्ष पद पर आसीन करवा सकती है।

जबकि दूसरी तरफ भाजपा के वरिष्ठ नेता राम सिंह के साथ पांच पार्षदों ने शपथ ली है। उनके साथ भाजपा समर्थित पार्षदों भी हैं। लेकिन उसके बावजूद भी भाजपा से बागी व भाजपा समर्थित पार्षदों ने कांग्रेस पार्षदों के साथ शपथ ली है।

उससे एक बात साफ तौर पर जाहिर हो गई है कि निश्चित तौर पर कुल्लू नगर परिषद अध्यक्ष पद हथियाने के लिए कांग्रेस और भाजपा ने आपस में हाथ मिला लिया है, जो निश्चित तौर पर जनादेश का अपमान है।

फिलहाल देखना यह है कि आने वाले समय में नगर परिषद अध्यक्ष पद पर कौन काबिज होता है।

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