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कुल्लू टुडे

विनोद महंत

कुल्लू नगर परिषद के अध्यक्ष पद के चुनाव को लेकर स्थानीय राजनीति में इस समय जबरदस्त जोड़-तोड़ और शह-मात का खेल चल रहा है।

वीरवार को पहले जीते हुए 5 आजाद पार्षदों ने शपथ ग्रहण की। उसके बाद स्थानीय विधायक कांग्रेस समर्थित 2 और  वार्ड नंबर 4 के भाजपा समर्थित पार्षद और भाजपा से ही संबंध रखने वाली और टिकट न मिलने के बाद आजाद चुनाव लड़ी वार्ड नंबर 8 की पार्षद को साथ ले और विधायक की मौजूदगी में 6 पार्षदों ने शपथ ग्रहण की।

गौरतलब है कि स्थानीय कांग्रेस विधायक सुंदर सिंह ठाकुर केवल 2 पार्षदों के बल पर भी जोड़-तोड़ (क्रॉस वोटिंग या गठबंधन) के जरिए अपना अध्यक्ष बनाने की पूरी कोशिश में जुटे हैं।

बता दें कि ​कुल्लू नगर परिषद में कुल 11 वार्ड (पार्षद) हैं। बहुमत के लिए किसी भी दल को 6 पार्षदों का समर्थन चाहिए होता है।

​कांग्रेस के पास केवल 2 पार्षद हैं। ​भाजपा समर्थित और निर्दलीय बाकी सीटों पर भाजपा समर्थित और आजाद उम्मीदवारों का कब्जा है।

​संख्या बल में काफी पीछे होने के बावजूद कांग्रेस विधायक पूरी बिसात बिछा रहे हैं, क्योंकि हिमाचल प्रदेश में नगर निकाय चुनावों में स्थानीय विधायक का वोट भी अध्यक्ष/उपाध्यक्ष के चुनाव में मायने रखता है।

जब रणनीति किसी भी एक पार्टी के पास स्पष्ट बहुमत नहीं होता, तो निर्दलीय और विपक्षी पार्टी के असंतुष्ट धड़े की भूमिका सबसे अहम हो जाती है। कांग्रेस विधायक इसी रणनीति पर काम कर रहे हैं।

वहीं जो निर्दलीय उम्मीदवार जीतकर आए हैं, उन्हें विकास कार्यों का हवाला देकर या किसी पद का आश्वासन देकर अपने पाले में लाने की कोशिश की जा रही है।

*​भाजपा में सेंधमारी*

भाजपा समर्थित पार्षदों में भी आपसी खींचतान या टिकट न मिलने की नाराजगी का फायदा उठाकर उन्हें “सरेंडर” करने या कांग्रेस समर्थित उम्मीदवार के पक्ष में क्रॉस-वोटिंग करने के लिए तैयार किया जा रहा है।
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*भाजपा के लिए झटका*

​अगर भाजपा समर्थित और आजाद प्रत्याशी कांग्रेस के इस चक्रव्यूह में घुटने टेक देते हैं, तो यह कुल्लू में भाजपा के लिए एक बड़ा राजनीतिक झटका होगा।

बहुमत होने के बावजूद संगठन की गुटबाजी या कमजोर पकड़ के कारण अक्सर ऐसे स्थानीय निकायों में सत्ता हाथ से निकल जाती है।

​फिलहाल, पर्दे के पीछे की यह ‘पॉलिटिकल इंजीनियरिंग’ अंतिम दौर में है, और देखना यह होगा कि वोटिंग के दिन कौन सा धड़ा एकजुट रह पाता है और कौन पाला बदलता है।

वहीं भाजपा पार्षद का कांग्रेस के साथ शपथ ग्रहण करना शहर में चर्चा का विषय बना हुआ है। जिसको लेकर लोग तह तह की बाते करते भी सुनाई दे रहे हैं।

लोगों का कहना है कि जब भाजपा और कांग्रेस को एक साथ मिलकर ही अध्यक्ष और उपाध्यक्ष बनाना था तो यह पार्टीबाजी की नौटंकी करने की क्या जरूरत थी।

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