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कुल्लू टूडे

बिलासपुर/कश्मीर ठाकुर

बीते 19 अप्रैल से एसीसी विस्थापित ट्रक ऑपरेटरों में सीमेंट ढुलाई ऐप को लेकर वर्तमान बीडीटीएस मैनेजमेंट के प्रति रोष बढ़ता जा रहा है।

शुक्रवार को स्थानीय विस्थापितों ने बीडीटीएस मैनेजमेंट के विरुद्ध पहले अपने कार्यालय में घंटो तक बैठक की और उसके उपरांत फैक्ट्री परिसर व बीडीटीएस कार्यालय तक रोष रैली निकाल कर अपना प्रदर्शन दिया और इनका यह संघर्ष 10 वें दिन में प्रवेश कर गया है।

बता दें कि स्थानीय एसीसी विस्थापित ट्रक ऑपरेटर यूनियन में 200 के करीब सदस्य जुड़े है। जिन्होंने बीडीटीएस मैनेजमेंट के विरुद्ध नारे लगाते हुए बीडीटीएस मैनेजमेंट द्वारा मनमानी से स्थानीय यूनियन पर ऐप प्रणाली थोपे जाने का आरोप लगाया।

उन्होंने कहा कि जबकि यह सीमेंट ढुलान के लिए ऐप प्रणाली कोविड -19 महामारी के दौरान समाजिक दूरी का पालन के लिए तय हुई थी। परन्तु बीडीटीएस ने इस प्रणाली को अभी तक जारी रखा है। जिसका दुष्परिणाम आज हमें स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है।

इस दौरान चेयरमैन रूप सिंह ठाकुर, प्रधान रतन ठाकुर, उप प्रधान नन्द लाल, पंजगाईं पंचायत के प्रधान सुषिक कुमार, पूर्व प्रधान दौलत राम ठाकुर, रमेश कुमार वर्मा, अशोक ठाकुर, सुरेश, बिट्टू आदि के अलावा कई विस्थापितों ने भाग लिया। पूर्व में एसीसी विस्थापित ट्रक ऑपरेटरों में समस्त बरमाणा पंजगाई, धौन-कोठी, बलोह, कुनणु के विस्थापित ट्रक ऑपरेटर ने चल रहे ऐप विवाद को लेकर जिला उपायुक्त से भी शिकायत की है।

जिला उपायुक्त ने बीडीटीएस मैनेजमेंट, एसीसी प्रबंधन और विस्थापितों को इस चल रहे विवाद को सुलझाने के लिए शीघ्र बचत भवन में बैठक रखी है।

एसीसी विस्थापित ट्रक ऑपरेटर प्रधान रतन ठाकुर ने बताया कि ऑनलाइन ऐप के माद्यम से सीमेंट ढुलाई प्राथमिकता को कम करने की साजिस रची जा रही है। पिछले 35 वर्षों से बीडीटीएस के साथ जुड़े है। विस्थापितों ने बीडीटीएस का हर जगह हर समय साथ दिया है। पूर्व में रहे सभा के प्रधान रामदास ठाकुर ने एसीसी विस्थापितों को अलग से प्राथमिकता दी है जो कि आज तक जारी है।

उन्होंने बताया कि अब वर्तमान कार्यकारिणी तानाशाही का रवैया अपनाकर विस्थापितों विस्थापितों के हकों को छीन रही। जिस तरह से विस्थापितों को दी जाने वाली प्रथम प्राथमिकता जिला में अन्य स्थान पर दी जाती है जैसे शाह तलाई, स्वारघाट, बरठी आदि स्थानों पर वहां के लोकल ऑपरेटर को दी जाती है, इस बारे में बीडीटीएस से बात करने की कोशिश की परंतु बीडीटीएस कार्यकारिणी ने तानाशाही का रवैया अपनाते हुए बातचीत नहीं की। बाबजूद इसके हमारी सीमेंट ढुलाई प्राथमिकता को कम कर रही है और ऑनलाइन एप का हवाला देकर तानाशाही का रवैया अपना रही है।

उन्होंने कहा कि बरमाणा में रोजगार के नाम पर अब कुछ भी नहीं रहा है, छोटे दुकानदार होटल, ढाबे, मिस्त्री तथा अन्य काम करने वाले मजदूर भी बेरोजगार हो चुके हैं है। परंतु फिर भी यह मैनेजमेंट यह सिस्टम हमारे बीच में लागू करना चाहती है। वर्तमान कार्यकारिणी को एसीसी बरमाना के विस्थापितों के हकों की रक्षा करनी चाहिए। यहां के लोग पहले से ही उजड़ते आ रहे है और अब रेलवे लाइन आने से उजड़ रहे है।

यहां के विस्थापित डस्ट व साउंड पोलूशन की वजह से कई गंभीर बीमारियों की चपेट में आ चुके हैं। इन सब बातों को देखते हुए सभा के सभी पूर्व प्रधानों ने एसीसी विस्थापित ट्रांसपोर्टरों को प्राथमिकता दी है। जिसका वर्तमान कार्यकारिणी उनके हकों का हनन कर रही है।

जिला उपायुक्त से उन्होंने मांग करते हुए कहा कि पिछले 19 तारीख से इस समस्या को लेकर निरंतर संघर्ष कर रहे हैं परंतु बीडीटीएस इस समस्या को हल करने की कोई रुचि नहीं दिखा रहा है । एसीसी विस्थापित ट्रक ऑपरेटरों ने चेतवानी देते हुए बताया कि अगर बीडीटीएस का यही रवैया रहा तो विस्थापित अपने हकों के लामबंद हो जाएंगें।

एसीसी विस्थापित ट्रक ऑपरेटर यूनियन के चेयरमैन रूप सिंह ठाकुर ने इस मसले पर कहा कि हमारा भाईचारा बना रहे इसलिए हम इस ऐप सिस्टम पूर्ण रूप से खत्म करें।

बीडीटीएस मैनेजमेंट एसीसी विस्थापित ट्रक ऑपरेटरों के साथ बैठकर मसलों का हल निकले। वर्तमान कार्यकारिणी को एसीसी बरमाना के विस्थापितों के हकों की रक्षा करनी चाहिए।

वर्तमान बीडीटीएस मैनेजमेंट ट्रक ऑपरेटरों को गुमराह कर रही है। विस्थापित का नाम लेकर चुनाव जीते है और अब बाँटने की कोशिश कोशिश कर रही है।

वर्तमान कार्यकारिणी बीडीटीएस की एकता और अखंडता को बनाए रखें अन्यथा इसके परिणाम सही नहीं होंगे।

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