कुल्लू टूडे
बिलासपुर, कश्मीर ठाकुर
हिमाचल चिकित्सा अधिकारी संघ संयुक्त संघर्ष समिति के प्रदेश महासचिव डा. विकास ठाकुर ने बिलासपुर में आयोजित पत्रकारवार्ता में कहा कि प्रदेश भर में चिकित्सक अपनी मांगों को लेकर संघर्ष की राह पर है लेकिन सरकार तुरंत राहत नहीं दे रही है।
हालांकि आगामी फरवरी में मुख्यमंत्री ने संघ को मिलने का समय दिया है और संघ आशावान है। इससे पहले शनिवार को डा. विकास ने जिले के कई स्वास्थ्य संस्थानों का दौरा किया तथा अपने सहयोगी चिकित्सकों की व्यथा को जाना।
वहीं पत्रकारों से रूबरू होते हुए उन्होंने कहा कि 18 जनवरी से काले बिल्ले लगाकर सेवाएं दे रहे चिकित्सकों की व्यथा मीडिया से सांझा करते हुए डा. विकास ठाकुर ने कहा कि प्रदेश के चिकित्सक इकाई अपनी मांगों को लेकर अपनी लड़ाई जारी रखेगी।
उन्होंने पांच सूत्रीय मांग पत्र पर चर्चा करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने 3 जून को हिमाचल प्रदेश चिकित्सा अधिकारी संघ की संयुक्त संघर्ष समिति को आश्वासन दिया था कि भविष्य में चिकित्सकों की नियुक्ति के समय एनपीए को पुनः संलग्न कर दिया जाएगा लेकिन धरातल पर विशेषज्ञ चिकित्सकों की नियुक्ति में इसे नहीं जोड़ा गया है। जिससे इस वर्ग में खासा रोष है।
उन्होंने कहा कि हिमाचल में अनुबंध पर नियुक्त विशेषज्ञ चिकित्सकों को 33660 रुपए वेतन के रुप में देय जोकि पूरे भारतवर्ष में सबसे कम है और साथ ही एक बहुत ही दुखद विषय भी है।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने 3 जून को एड्स कंट्रोल सोसाइटी के प्रोजेक्ट डायरेक्टर का भार भी पुणे स्वास्थ्य निदेशक को लौटने की बात कही थी, साथ ही मेडिकल कॉलेज में प्रधानाचार्य और वरिष्ठ स्वास्थ्य अधीक्षक की शक्तियों को भी संशोधन के साथ लौटाने के लिए सहमति जताई थी।
परन्तु मुख्यमंत्री के वायदों को सात महीने बीत जाने के बाद भी पालन न होने पर चिकित्सा समुदाय में भारी रोष है।
डा. विकास ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग में लगभग डेढ़ वर्षों से खंड चिकित्सा अधिकारी जिला चिकित्सा अधिकारी डिप्टी डायरेक्टर्स के पदों पर पदोन्नति नहीं हुई है।
इस संदर्भ में उन्हें केंद्रीय सरकार की तर्ज पर डायनेमिक करियर प्रोग्रेशन स्कीम के तहत लाभ प्रदान किए जाएं।
हिमाचल प्रदेश में चिकित्सक दुर्गम क्षेत्रों में भी दिन.रात अपनी सेवाएं प्रदान कर रहे हैं और उन्हें व केंद्रीय सरकार या बिहार जैसे अन्य राज्यों की अपेक्षा में बहुत ही कम वेतन दिया जा रहा है और उनके बाद एनपीए को पेंशन की गणना से हटाना भी एक दुर्भाग्यपूर्ण विषय है।
संयुक्त संघर्ष समिति ने मुख्यमंत्री से आग्रह किया है कि जो लाभ पहले से चिकित्सकों को से मिलता आ रहा है उसे यथावत पुनः प्रदान किया जाए।
इसके साथ उन्होंने सेवा विस्तार पर भी तुरंत रोक लगाने की गुहार सरकार से लगाई।
उन्होंने कहा कि इस अवैध सेवा विस्तार से जहां पदोन्नति के अवसर समाप्त हो रहे हैं।
वहीं नए युवाओं के भविष्य के साथ भी खिलवाड़ हो रहा है। इसके अलावा उन्होंने सेवानिवृत चिकित्सकों की समस्याओं पर भी मंथन किया।
पत्रकारवार्ता में हिमाचल चिकित्सा अधिकारी संघ बिलासपुर इकाई के प्रधान डा. भूपेंद्र शर्मा, महासचिव डा. प्रदीप कुमार, एमएस डा. सतीश शर्मा, डा. अनुपम शर्मा, डा. निशांत वर्धन, डा. पारस सहगल, डा. ऋषि टंडन, डा. शिवांशु, डा. शुभम और डा. दीक्षा चौधरी मौजूद रहे।
