कुल्लू टूडे
बिलासपुर / कश्मीर ठाकुर
व्यवसायिक शिक्षक संघ की वरिष्ठ उपाध्यक्ष यामिनी पवार ने कहा कि प्रदेश सरकार व्यावसायिक शिक्षकों के बारे में भी ध्यान दें। साथ ही व्यवसायिक शिक्षकों के लिए जल्द ही स्थाई नीती का निर्माण करे।
उन्होंने कहा कि जहां एजुकेशन पॉलिसी में व्यावसायिक शिक्षा पर जोर दिया गया है वहीं दूसरी तरफ लंबे समय से व्यावसायिक शिक्षक शोषण का शिकार हो रहे है।
व्यावसायिक शिक्षक लगभग 9 वर्ष बीत जाने के बाद भी कम्पनियों के अधीन काम करने पर मजबूर हैं। अब इन शिक्षको की एक मात्र मांग है की कांग्रेस सरकार इन्हें पीटीए शिक्षकों की भांति जल्द ही स्थाई नीति का निर्माण करे।
हिमाचल प्रदेश व्यवसायिक शिक्षक संघ प्रधान अश्विनी डटवालिया, वरिष्ठ उपाध्यक्ष यामिनी पवार , सचिव नीरज बंसल ने जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा कि हिमाचल प्रदेश में व्यावसायिक शिक्षा का प्रारंभ वर्ष 2013 से पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के कार्यकाल में 100 विद्यालयों में शुरू हुआ था।वर्तमान में 1100 से अधिक विद्यालयों में 15 विषयों में सफलतापूर्वक सुचारु रुप से चल रहा है।
उन्होंने बताया कि विद्यालयों में कार्यरत 2000 से अधिक व्यावसायिक शिक्षक कंपनियों के अधीन कार्य क्यों कर रहे हैं ?
जबकि केंद्र सरकार के दिशा निर्देशानुसार व आरटीआई एक्ट 2005 से प्राप्त जानकारी के आधार पर केंद्र सरकार द्वारा दी जाने वाली राशि 90:10 के अनुपात में राज्य सरकार के अधीन होने के बावजूद भी जारी रहेगी और साथ ही ये कंपनियां 14% प्रबंधन लागत के नाम पर लगभग 6 करोड़ 73 लाख 68 हजार रुपए सालाना बाहरी कंपनियां हड़प रही है।
इसकी बचत भी होगी, जिसका लाभ स्वत: ही इन व्यावसायिक शिक्षकों को होगा। शिक्षा मंत्री से आग्रह किया है कि व्यावसायिक शिक्षकों के नीति निर्धारण लिए प्रदेश सरकार की योजना क्या रहेगी।
