कुल्लू टूडे
बिलासपुर/कश्मीर ठाकुर
भानुपल्ली से बरमाणा तक भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया लगभग पूरी हो चुकी है। इस रेलवे लाइन में कुड्डी से बरमाणा तक 538 बीघा जमीन है जिसमे 406 बीघा जमीन केवल बरमाणा पंचायत की ही अधिगृहित हो रही है। इस लाइन से विस्थापित व प्रभावित हो रहे ग्रामीणों ने जिला प्रशासन पर अनदेखी का आरोप लगाते हुए कहा कि वे 36 सालों से विस्थापन का दंश झेलते आ रहे हैं। इन समस्याओ को लेकर बरमाणा में पंचायत प्रधान पूजा धीमान, रूपसिंह ठाकुर, कुलदीप ठाकुर, गंगा सिंह, रतन ठाकुर, देवराज, सुरेंदर शर्मा, विजय ठाकुर ने प्रेस वार्ता की।
इस दौरान रूपसिंह ठाकुर ने कहा कि बरमाणा के लोग पिछले 38 सालों से विस्थापन का दंश बार बार झेलते आ रहें हैं। चार दशक पहले एसीसी सीमेंट फैक्ट्री लगने से लोगों को उजड़ना पड़ा। उसके बाद फिर दुबारा एसीसी से उजड़े। अब तीसरी बार भानुपल्ली लेह रेलवे लाइन से उजड़ना पड़ रहा है।
उन्होंने कहा कि बरमाणा में जहां जंक्शन बन रहा है वहां पर एसीसी की भी अधिकृत जमीन खाली पड़ी है। ट्रैक का लेआउट बदलकर बस्ती उजाड़ने के बजाय एसीसी की जमीन अधिग्रहण कर हमें यथास्थिति में रखा जाए।
उन्होंने कहा कि सदर सुभाष विधायक द्वारा भी हमारी समस्याओ को विधान सभा मे रखा गया परंतु प्रशासन द्वारा कोई सकारात्मक कदम नही उठाया गया व जनता के प्रतिनिधि का भी मान नही रखा।
कुलदीप ठाकुर ने कहा कि
भले ही तीसरे फेज में भूमि के अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी होने के बाद भानुपल्ली से बरमाणा तक 63.1 किलोमीटर तक की भूमि पर रेललाइन के निर्माण का रास्ता साफ हो, लेकिन अगर बरमाना के प्रभावित व विस्थापितों से समय रहते बात नही की तो लोग बाधक बन सकते है।
उन्होंने समाजिक प्रभाव मूल्यांकन रिपोर्ट हेतु जो मल्टीग्रुप ऐक्सपर्ट कमेटी बनाई गई है उसमें बरमाणा पंचायत के किसी भी मेंबर को स्थान नही दिया।
जबकि नोग कुड़ी पराथु बग्गड़ बेरी जिनकी 132 बीघे जमीन गई उनको मेंबर बनाया है। इस पिक एंड चूज की नीति से बरमाणा पंचायत के होने वाले विस्थापितों में संसय पनप रहा है।
प्रभावितों ने प्रशासन से मांग की है कि बरमाणा में लोगों की एक बार फिर मौके पर जाकर लोगों की मांग के अनुरूप समस्याओं पर गहन विचार-विर्मश करके त्वरित समाधान सुनिश्चित बनाए।
