कुल्लू टूडे
बिलासपुर/कश्मीर ठाकुर
देश को रौशन करने वाले प्रथम भाखड़ा विस्थापितों के जिला बिलासपुर के दूसरे कोल डैम विस्थापितों की दशा तकरीबन इनके ही तरह है।
हैरानी की बात है कि कोलबांध परियोजना के बनने से पूर्व ग्रामीणों को कई सब्जबाग दिखाए गए। अब जब बिजली उत्पादन शुरू हो गया है तो राॅयल्टी मिलना तो दूर इन विस्थापितों की सुख सुविधा को भी दरकरार किया जा रहा है।
एनटीपीसी कोलबांध के कार्यालय और उनकी सड़कें आदि चकाचक है लेकिन विस्थापितों की कालोनी की दुर्दशा इतनी भयावह है कि लोग अपने जान को हथेली में रखकर जीवन जीने को विवश हैं। रोचक बात यह है कि इन विस्थापितों की समस्याओं पर न तो एनटीपीसी प्रशासन, न तो जिला प्रशासन और न ही कोई जनप्रतिनिधि सुलझाने के लिए आगे आ रहा है। इसी आशय को लेकर ग्रामीणों ने एनटीपीसी की पुनर्वास उपनगरी जमथल में धरना प्रदर्शन किया तथा वहां पर विशेष रूप से मौजूद जिला परिषद अध्यक्षा कुमारी मुस्कान के समक्ष अपना दुखड़ा रोया।
ग्रामीणों ने बताया कि कालोनी को जाने वाली सड़क पूरी तरह से टूट चुकी है। डंगे ढह रहे हैं जबकि सड़क के दोनो ओर झाड़ियों का साम्राज्य अपनी दुर्दशा को बयान कर रहा है। पहले से तंग और किचड़ से भरी सड़कों पर पैदल चलने वालों के लिए परेशानी का सबब है। यही नहीं इस बरसात में ढहे ढंगों का मलबा रिहायशी मकानों में खिड़कियां तोड़कर अंदर आ गया है। पूरी तरह से खतरे की जद में आ चुके मकानों में लोग अपनी जान को जोखिम में डालकर जीवन जीने को विवश हैं। इस सारी कालोनी में सफाई नाम की कोई वस्तु नहीं है। पीएम नरेंद्र मोदी के स्वच्छता अभियान को ठेंगा दिखाती इस कालोनी में लोग जोखिम में जी रहे हैं।
जिला परिषद अध्यक्षा कुमारी मुस्कान ने कहा कि सेड़पा कालोनी की समस्याओं को लेकर उन्होंने लिखित तौर पर एनटीपीसी प्रबंधन से वार्ता की है लेकिन वे सहयोग नहीं कर पा रहे हैं। इसलिए अब सात दिन का समय दिया गया है यदि एनटीपीसी ग्रामीणों की समस्याओं को नहीं सुनती है तो वे सड़कों पर उतरने के लिए बाध्य होंगे।
इस अवसर पर महिलाओं और पुरुषों ने बताया कि उनकी जायज मांगों को एनटीपीसी प्रबंधन द्वारा दरकिनार किया जा रहा है। एनटीपीसी प्रबंधन कभी जिला प्रशासन के पास भेजता है तो कभी विभागीय चक्कर कटवा रहा है। ग्रामीणों ने बताया कि यहां पर कोलडैम जलाशय से झील लबालब भरी है लेकिन लोगों को पीने के पानी का संकट है।
हैरानी की बात है कि यहां पर टैंकर से पानी मंगवा कर लोग अपनी दिनचर्या की जरूरतों को पूरा कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि एनटीपीसी के साथ हुए करार में मूलभूत सुविधाओं को देने का लिखित जिक्र है किंतु एनटीपीसी प्रबंधन ने जिम्मेवारियों से अपना मुंह मोड़ लिया है।
ग्रामीणों का जीवन किसी दूर दराज के क्षेत्रों में रहने वालों से कम नहीं है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र ही उनकी समस्याओं का समाधान नहीं किया जाता है तो मजबूरन उन्हें सड़कों पर उतरना होगा। जिसकी जिम्मेवारी संबंधित प्रशासन, जिला प्रशासन और प्रदेश सरकार की होगी।
इस अवसर पर बीडीसी अशोक शर्मा, प्रधान ग्राम पंचायत हरनोड़ा देशराज ठाकुर, उपप्रधान राजीव कुमार, राजेंद्र कुमार, सतपाल, अमृत चंद, जगदीश कुमार, किशोरी लाल, बालक राम, रेणु कुमारी, निक्की देवी, राकेश कुमार, अखिल पुरी, रामप्यारी, मंजू देवी, इशिदा शर्मा, रजनी देवी, लता देवी, अंजू देवी, सरला देवी, अनिता देवी, विष्णा देवी आदि मौजूद थे।
