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कुल्लू टुडे

बिलासपुर, कश्मीर  ठाकुर

हिमुडा निदेशक मंडल सदस्य जितेंद्र चंदेल ने भानुपल्ली-बिलासपुर-बैरी-बरमाणा रेलवे परियोजना को लेकर केंद्र सरकार की भूमिका पर सवाल उठाए हैं।

प्रेस वार्ता के दौरान चंदेल ने कहा कि केंद्रीय स्वास्थ्य, उर्वरक एवं रसायन मंत्री जेपी नड्डा ने हाल ही में हिमाचल दौरे के दौरान प्रदेश सरकार पर बिलासपुर से बरमाणा तक रेल पहुंचाने में सक्षम नहीं होने और इसके लिए राशि उपलब्ध न करवाने की बात कही है।

चंदेल ने कहा कि एमओयू के अनुसार बिलासपुर से बरमाणा तक रेल पहुंचाने के लिए प्रदेश सरकार को करीब 1500 करोड़ रुपये का खर्च वहन करना पड़ेगा।

उन्होंने सवाल उठाया कि जब प्रस्तावित रेल परियोजना को आगे लेह तक पहुंचाया जाना है तो इसका आर्थिक बोझ हिमाचल प्रदेश सरकार पर क्यों डाला जाए। उन्होंने कहा कि इसका खर्च केंद्र सरकार को वहन करना चाहिए।

उन्होंने कहा कि इस रेल परियोजना से हिमाचल को होने वाले प्रत्यक्ष लाभ को भी स्पष्ट किया जाना चाहिए।

चंदेल के अनुसार परियोजना का सीधा लाभ बरमाणा क्षेत्र में स्थापित औद्योगिक गतिविधियों और रेलवे से जुड़े हितधारकों को मिल सकता है, जबकि स्थानीय स्तर पर बड़ी संख्या में ट्रांसपोर्टर प्रभावित होने की आशंका है।

*20 हजार परिवारों के रोजगार का मुद्दा उठाया*

जितेंद्र चंदेल ने कहा कि बरमाणा क्षेत्र में करीब 20 हजार परिवार ट्रांसपोर्टेशन कारोबार और उससे जुड़े कार्यों पर निर्भर हैं। यदि रेल के माध्यम से माल परिवहन बढ़ता है तो इन परिवारों के कारोबार पर असर पड़ सकता है।

उन्होंने केंद्र सरकार से पूछा कि इन परिवारों के हितों की सुरक्षा और उनके भविष्य के लिए क्या योजना बनाई गई है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि वह रेल परियोजना के विरोध में नहीं हैं।

उन्होंने कहा, “हम ट्रेन का विरोध नहीं करते। ट्रेन आए, यह अच्छी बात है और हम इसका स्वागत करते हैं, लेकिन जिन 20 हजार परिवारों की रोजी-रोटी ट्रांसपोर्टेशन कारोबार पर निर्भर है, उनके हितों को भी सुरक्षित किया जाना चाहिए।

चंदेल ने कहा कि केंद्र सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि रेल परियोजना के कारण प्रभावित होने वाले ट्रांसपोर्टरों और उनसे जुड़े परिवारों के लिए किस प्रकार की व्यवस्था की जाएगी।

गौरतलब है कि भानुपल्ली-बिलासपुर-बैरी रेल परियोजना की कुल लंबाई करीब 63.1 किलोमीटर बताई गई है और परियोजना का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बिलासपुर के बरमाणा तक प्रस्तावित है।

वहीं हाल में हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने बध्यात से बरमाणा के बीच करीब 11.1 किलोमीटर हिस्से के लिए भूमि अधिग्रहण से जुड़ी अधिसूचनाओं को रद्द किया है।

इस अवसर पर पूर्व जिला परिषद सदस्य राजेंद्र ठाकुर, सिहड़ा पंचायत प्रधान दयानंद, एनएसयूआई प्रदेश सचिव रितिक सोनी तथा कांग्रेस नेता पवन ठाकुर मौजूद रहे।

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