कुल्लू टुडे
बिलासपुर, कश्मीर ठाकुर
उम्र केवल एक संख्या है और यदि हौसले बुलंद हों तो जीवन के किसी भी पड़ाव पर सफलता की नई इबारत लिखी जा सकती है।
बिलासपुर की बेटी सुषमा शर्मा ने इस बात को न केवल साबित कियाए बल्कि देशभर की महिलाओं के लिए एक प्रेरणादायक मिसाल कायम कर दी है।
दिवा पेजेंट्स द्वारा आयोजित मिस, मिसेज इंडिया एम्प्रेस ऑफ द नेशन, प्रतियोगिता में 55 वर्ष एवं इससे अधिक आयु वर्ग के प्लेटिनम वर्ग में सुषमा शर्मा ने शानदार प्रदर्शन करते हुए विजेता का ताज अपने नाम कर लिया।
यह उपलब्धि इसलिए भी विशेष है, क्योंकि सुषमा शर्मा इससे पहले भी 2024 में इसी प्रतियोगिता में हिस्सा ले चुकी हैं और उस समय उपविजेता रही थीं। लेकिन उन्होंने हार को मंजिल नहीं माना।
अपने आत्मविश्वास, लगन और निरंतर प्रयास के साथ दोबारा प्रतियोगिता में उतरीं और इस बार विजेता बनकर उम्र को चुनौती देकर मुकाम हासिल किया और इतिहास रच दिया।
प्रतियोगिता के मार्गदर्शक अंजना मस्कारेन्हास और कार्ल मस्कारेन्हास के मार्गदर्शन में आयोजित इस प्रतियोगिता में प्रतिभागियों ने अपने व्यक्तित्व, आत्मविश्वास, प्रतिभा और जीवन के अनुभवों का परिचय दिया।
सुषमा शर्मा ने अपनी प्रस्तुति और व्यक्तित्व से निर्णायकों को प्रभावित करते हुए प्लेटिनम वर्ग का विजेता ताज हासिल किया।
आध्यात्मिकता से समाजसेवा तक बहुआयामी व्यक्तित्व सुषमा शर्मा की पहचान केवल एक प्रतियोगिता की विजेता के रूप में नहीं है।
वह आर्ट ऑफ लिविंग की अंतरराष्ट्रीय शिक्षिका हैं और लंबे समय से आध्यात्मिकता, ध्यान, योग तथा सकारात्मक जीवनशैली के माध्यम से लोगों को प्रेरित कर रही हैं।
वह पुणे और बिलासपुर में अपनी गतिविधियों से जुड़ी हुई हैं तथा समाजसेवा के कार्यों में भी निरंतर सक्रिय रहती हैं।
जरूरतमंदों की सहायता से लेकर लोगों को मानसिक शांति, सकारात्मक सोच और बेहतर जीवन की दिशा दिखाने तकए उनका जीवन सेवा और प्रेरणा से जुड़ा रहा है।
यही वजह है कि उनका यह सम्मान केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि सेवा, साधना, आत्मविश्वास और निरंतर प्रयास की जीत के रूप में देखा जा रहा है।
सुषमा शर्मा का परिवार भी अपने.अपने क्षेत्रों में उल्लेखनीय पहचान रखता है। उनके पति भारतीय राजस्व सेवा के अधिकारी थे और सीमा शुल्क विभाग के मुख्य आयुक्त के पद से सेवानिवृत्त हुए हैं।
उनकी बेटी चांदनी चिकित्सक हैं, जबकि उनके पुत्र पार्थ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान रखने वाले छाया चित्रकार हैं।
परिवार की उपलब्धियों के बीच सुषमा शर्मा ने अपनी मेहनत और व्यक्तित्व के बल पर अपनी अलग पहचान कायम की है।
