कुल्लू टुडे
कुल्लू
क्षेत्रीय अस्पताल कुल्लू में 23 वर्षीय प्रसूता मंजू शर्मा की मौत के बाद उठे जनाक्रोश ने आखिरकार असर दिखाया। हजारों लोगों के प्रदर्शन और आमरण अनशन के बाद हिमाचल प्रदेश स्वास्थ्य विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए आरोपी डॉक्टर को निलंबित कर दिया है।
स्वास्थ्य विभाग की प्रधान सचिव एम. सुधा देवी, IAS द्वारा 30 जून 2026 को जारी आदेश में क्षेत्रीय अस्पताल कुल्लू की स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. अनु देवी को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया गया है।
सरकारी आदेश No. HFW-A-B(15)16/2022 में साफ लिखा है। कि 21.6.2026 को क्षेत्रीय अस्पताल कुल्लू में डॉ. अनु देवी ने एक मरीज का ऑपरेशन किया था, जिसके बाद मरीज की मृत्यु हो गई।
इसी ‘कदाचार’ के लिए डॉ. अनु देवी के खिलाफ जांच प्रस्तावित है। CCS (CCA) नियम, 1965 के नियम 10 के तहत डॉ. अनु देवी को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया जाता है।
आदेश में आगे कहा गया है कि निलंबन अवधि के दौरान डॉ. अनु देवी का मुख्यालय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण निदेशालय, शिमला रहेगा। वे सक्षम प्राधिकारी की पूर्व अनुमति के बिना मुख्यालय नहीं छोड़ सकेंगी।
गौरतलब है कि रजनी शर्मा की सिजेरियन के बाद मौत हो गई थी। उसने एक नवजात बच्ची को जन्म दिया था, जो जन्म लेते ही अनाथ हो गई। परिजनों ने डॉक्टर पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए बर्खास्तगी की मांग की थी।
जब सरकार ने कोई कार्रवाई नहीं की तो बालीचौकी, सराज और कुल्लू से हजारों लोग सड़कों पर उतर आए। ढालपुर चौक से अस्पताल तक रोष रैली निकाली गई, अस्पताल का गेट तोड़कर प्रदर्शन किया गया और आमरण अनशन शुरू हो गया था।
इसी जनदबाव के बाद 30 जून को शिमला से यह निलंबन आदेश जारी हुआ। आदेश पर विशेष सचिव (स्वास्थ्य) जितेंदर सांजटा के भी हस्ताक्षर हैं।
डॉ. अनु देवी के निलंबन को परिजन और प्रदर्शनकारी ‘इंसाफ की पहली जीत’ बता रहे हैं।
हालांकि उनकी मांग है कि मामले की निष्पक्ष जांच हो और दोषी पाए जाने पर आपराधिक कार्रवाई की जाए। सवाल अब भी बाकी है, क्या सिर्फ निलंबन काफी है? एक मां की जान की कीमत क्या सिर्फ सस्पेंशन है?
21 जून को हुई मौत पर 30 जून तक कार्रवाई का इंतजार क्यों करना पड़ा? क्या हजारों लोगों के सड़क पर उतरने के बाद ही सिस्टम जागता है? वो नवजात बच्ची, जिसने जन्म के साथ ही मां खो दी, क्या उसे पूरा इंसाफ मिल पाएगा?
फिलहाल स्वास्थ्य विभाग ने जांच शुरू कर दी है। आदेश की प्रतियां निदेशक स्वास्थ्य सेवाएं, सीएमओ कुल्लू और एमएस क्षेत्रीय अस्पताल कुल्लू को भेजी गई हैं।
मंडी जिला के बालीचौकी क्षेत्र की इस बेटी मंजू की मौत ने सिस्टम को हिला तो दिया है, लेकिन असली इंसाफ तभी होगा जब लापरवाही की पूरी सच्चाई सामने आए और दोषियों को सजा मिले।
