कुल्लू टूडे
बिलासपुर/कश्मीर ठाकुर
मुख्य चिकित्सा अधिकारी बिलासपुर डॉ. प्रवीण कुमार ने बताया कि जल जनित बीमारियों के स्वास्थ्य पर पडने वाले दुष्प्रभाव के बारे में भी जागरूक रहने की आवश्यकता है।
उन्होने बताया कि विश्व की 80 प्रतिशत से अधिक बीमारियां दूषित जल से होने वाले रोगों के कारण होती हैं जिनमें डायरिया प्रमुख है। यद्यपि जल प्राकृतिक रूप से स्वच्छ होता है लेकिन मानव गतिविधियों और वातावरण की अशुद्धियां मिल जाने के कारण इसके रसायनिक, भौतिक और जैविक गुणों का ह्रास हो जाता है, जिसे जल प्रदूषण कहा जाता है। जल के बिना जीवन की कल्पना नहीं की जाती, इसलिए जल ही जीवन है, कहा जाता है।
उन्होने बताया कि नगरों के सीवरेज तथा नालियों द्वारा, उद्योगों से निकलने वाले रसायनिक विषैले खनिज पदार्थ जैसे ऑर्गनिक, शीशा, कंडेनियम एवं पारा इत्यादि, दैनिक घरेलू कार्यों, खाना पकाने, स्नान करने, जल स्त्रोतों में कपड़े धोने, कृषि उत्पादन बढ़ाने के लिए रसायनिक उर्वरकों एव कीटनाशकों का अत्यधिक उपयोग के कारण् जल प्रदूषण होता है।
उन्होने बताया कि गर्मियों तथा बरसात के मौसम में विशेष कर दस्त रोग शिशुओ और बच्चों तथा आम लोगों में हो जाता है जिसका अगर समय पर उसका उपचार न किया गया तो निर्जलीकरण से मौत भी हो सकती है। जल जनित रोगों से बचाव के लिए जल स्त्रोतों को गंदा न करेंए उनमें स्नान न करें न ही कपड़े धोएं।
पेयजल स्रोतों के चारों ओर कंक्रीट की दीवार लगानी चाहिए ताकि वर्षा का पानी उसमें न जाएए शौच खुले में न जाएँ, शौच जाने के लिए शौचालय का ही प्रयोग करेंए पीने के लिए क्लोरीन युक्त नल के जल या हैण्ड पम्प के पानी का ही उपयोग करें।
