कुल्लू टूडे
बिलासपुर, कश्मीर ठाकुर
लोक संस्कृति को जीवंत रखना हर कलाकार का कर्तव्य है। यह बात हिमाचल के प्रसिद्ध लोक गायक काकू राम ठाकुर ने कुल्लू टूडे के बिलासपुर ब्यूरो कश्मीर ठाकुर के साथ हुई विशेष बातचीत के दौरान कही।
उन्होंने बताया कि पहली बार उन्हें गुग्गा जी की पावन धरती पर आने का अवसर मिला है, और वे इसे अपने लिए सौभाग्य मानते हैं।
उनके अनुसार मंच मेरे लिए केवल प्रस्तुति का स्थान नहीं है। यह मेरे लिए एक मंदिर के समान है, यही मेरी कर्मभूमि है, यही से मुझे रोज़ी-रोटी मिलती है और यही मेरे भाग्य का आधार भी है। मैं मंच के ज़रिए समाज सेवा करने में भी विश्वास रखता हूं।
उन्होंने भारतीय संस्कृति और हिंदू शास्त्रों का उल्लेख करते हुए कहा कि ये हमें बड़ों का आदर करना, संस्कृति से जुड़ाव और देव आस्था का पाठ पढ़ाते हैं।
काकू राम ठाकुर ने अपने इस मुकाम तक पहुंचने का श्रेय अपने माता-पिता को दिया और बताया कि इस क्षेत्र में आए हुए 22 वर्ष हो गए और संघर्ष करने के बाद ही आज वे इस सफलता तक पहुंचे हैं।
उन्होंने देश के कई राज्यों में प्रस्तुति दी है, और हर जगह अपनी स्थानीय भाषा और संस्कृति को प्राथमिकता दी।
अपनी गायन यात्रा की शुरुआत को याद करते हुए उन्होंने बताया कि वर्ष 2003 में जब वे स्कूल में पढ़ते थे, तब उन्हें पहली बार चम्बा के मिंजर मेले में मंच पर गाने का मौका मिला। वह अनुभव आज भी उनकी यादों में ताजा है।
उन्होंने समाज को एक संदेश देते हुए कहा कि अभिभावकों को चाहिए कि वे अपने बच्चों को नशे से दूर रखें और उन्हें सही दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करें। हमारा भविष्य बच्चों के हाथ में है।
