कुल्लू टूडे
शिमला/बिलासपुर, कश्मीर ठाकुर
गंज बाजार शिमला में स्थित श्रीराधा कृष्ण मंदिर में चल रही श्रीमद भागवत कथा के छठे दिन प्रवचनों की अमृतवर्षा करते हुए पंडित सुरेश भारद्वाज ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण का प्रेम पाने के लिए गोपी बनना आवश्यक है।
उन्होंने बताया कि गोपी का बनना कोई नारी बनने से नहीं है। गोपी बनने का मतलब स्वयं को भूलना और प्रभु भक्ति में संपूर्ण लीन हो जाना है।
उन्होंने कहा कि जब भगवान श्रीकृष्ण मृत्यु लोक में आने लगे छोड़कर जाने लगे तो प्रकृति का हर अंश रूदन अवस्था में आ गया।
सभी को लगा कि श्रीकृष्ण का वियोग वे सह नहीं पाएंगे और जीते जी मर जाएंगे। ऐसे में गोपियों ने भी भगवान के साथ चलने की जिद की।
लेकिन कृष्ण ने समझाया कि जिस स्थान पर मैं जा रहा हूं, वहां आप सब नहीं जा सकते। गोपियों ने कहा कि भगवन हमें अपनी बांसुरी बनाकर ले चलें।
तब भगवान ने कहा कि इसके लिए तुम्हें बांस का पौधा बनना पड़ेगा, फिर कटने का दर्द झेलना पड़ेगा, उसके बाद विभिन्न छिद्र किए जाएंगे। ऐसी यातनाओं से गुजरना पड़ेगा।
फिर भी गोपियां नहीं मानी और भगवान के साथ चल पड़ीं। इसी के साथ उन्होंने भक्त प्रहलाद का प्रसंग सुनाया।
श्रीहरि की भक्ति में लीन प्रह्लाद को पहाड़ की ऊंची चोटी से गिराया गया, समुद्र में फेंका गया, विष का प्याला दिया गया, काल कोठरी में बंद भी किया गया लेकिन यह संघर्ष भी उनको विचलित नहीं कर पाया।
भक्त की इस दृढ़ता को देखकर भगवान को नरसिंह अवतार लेना पड़ा। प्रह्लाद इस संघर्ष में विजय योद्धा बन पाए।
जब देव ऋषि नारद ने उनकी माता को ज्ञान दिया तो प्रह्लाद को भी माता के गर्भ में ही ब्रह्म ज्ञान प्राप्त हुआ।
उन्होंने कहा कि परमात्मा के प्रकाश रूप को देख लेने के पश्चात ही प्रेम पैदा होता है और भक्ति का प्रारंभ होता है।
भक्ति प्रगाढ़ होने पर आत्मा परमात्मा से एकाकार हो जाती है, पूर्णतया उसके रंग में रंग जाती है।
