Spread the love

कुल्लू टूडे

बिलासपुर, कश्मीर ठाकुर

विश्व विख्यात शक्ति पीठ श्री नयना देवी जी में भव्य कलश एवं शोभायात्रा के साथ श्रीमद भागवत कथा का शुभारंभ हो गया।

इस कथा यज्ञ में प्रसिद्ध कथा वाचक पंडित सुरेश भारद्वाज प्रवचनों की अमृतवर्षा कर रहे हैं।

इस दौरान उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का विवेचन कर श्रद्धालुओं को भाव विभोर किया।

उन्होंने कहा कि भगवान ने आम जन को भय मुक्त करने के लिए तमाम दुखों और कष्टों को अपने उपर झेला है।

उन्होेंने कहा कि जो अपने बच्चों को यश देती है वह यशोद्वा है और जो आनंद देते हैं वे नंद यानि नंद बाबा है।

उन्होंने कहा कि जब कंस को यह पता चल गया कि उसकी मृत्यु का कारण देवकी के गर्भ से पैदा हो चुका है तथा सुरक्षित निकल भी गया है तो वह अत्यंत क्रोधित हुआ तथा बाल कृष्ण की हत्या करने की योजनाएं तैयार करने लगा। इतने में उसने अपनी सहोदरा पुतना को भेजा।

पूतना अपने स्तनों पर विष लगाकर योजनाबद्ध तरीके से नंद बाबा के घर तक पहुंच गई। जहां पर उसने माता यशोद्धा से कान्हा से मिलने की इच्छा व्यक्त की।

सरल स्वभाव की यशोद्धा ने भी ज्यादा प्रश्न न करते हुए कान्हा को उसे सौंप दिया। भगवान श्रीकृष्ण को ज्ञात था कि यह स्त्री कौन है।

पंडित ने बताया कि जैसे ही पूतना ने कान्हा को गोद में लिया तो उन्होंने अपनी आंखे बंद कर ली।

उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण की आंखे बंद करने के पीछे रहस्य यह था कि यदि उनके नयन पूतना के नयनों से मिलते तो कही प्रेम न हो जाता, जिससे उसका वध करने में यही प्रेम आड़े आता।

धोखे से पूतना ने कान्हा को अपने स्तनो से दूध पिलाना शुरू किया। कान्हा ने पहले दूध पिया फिर विषपान किया। विष पान करने से पूर्व कान्हा ने नीलकंठ महादेव को स्मरण किया।

विषपान के बाद जब कान्हा उसके प्राणों का पान करने लगे तो भयंकर नाद करती हुई पूतना अपने वास्तविक रूप में आ गई। गांव में कोलाहल मच गया। धीरे-धीरे कान्हा ने पूतना का वध कर दिया।

वहीं पंडित ने श्रद्धालुओं को यह भी समझाया कि कोई अज्ञात व्यक्ति मिले तो एकदम से उस पर विश्वास नहीं कर लेना चाहिए। कई बार यह घातक साबित होता है।

Leave a Reply

You missed

error: Content is protected !!