कुल्लू टूडे
बिलासपुर/कश्मीर ठाकुर
स्थानीय कहलूरी (बिलासपुरी) भाषा को प्रमोट करने के लिए बिलासपुर जिले के राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक स्कूल बंदला ने बाजी मार ली है।
यह स्कूल जिला का पहला स्कूल बन गया है जहां पर सुबह की प्रार्थना तथा अन्य सभी कार्य कहलूरी भाषा में किए जा रहे हैंं।
ऐसा कार्य आज दिन तक जिला का कोई स्कूल नहीं कर पाया था। अपनी लोकल भाषा को प्रमोट करने के लिए स्कूल प्रबंधन ने कहलूरी भाषा में सुबह की प्रार्थना शुरू कर दी।
हिंदी की प्रार्थना मां सरस्वती वर दे मां को कहलूरी भाषा में कंपोज करके मां सरस्तवी वरदे माएं, बनाकर पूरी प्रार्थना को कहलूरी में अनुवादित कर डाला।
इस प्रार्थना को इस स्कूल के अध्यापक रंगकर्मी अभिषेक डोगरा ने कंपोज किया है। सुबह स्कूल प्रेयर में स्कूली विद्यार्थी कहलूर भाषा में ही लेक्चर भी देते है।
जिसमें बिलासपुर का नलवाड़ी मेला या फिर कहलूर की रियासत के बारे में बताया जाता है। यह लेक्चर भी कहलूरी भाषा में बोला जाता है।
कहलूरी भाषा में प्रार्थना शुरू करने वाला बंदला का यह सरकारी स्कूल जिला का पहला एक मात्र स्कूल होगा।
बंदला स्कूल अपनी स्थानीय भाषा को प्रमोट करने के लिए आए दिन नए प्लान तैयार करते रहता है।
इसके साथ ही स्कूल प्रबंधन ने यह भी प्लान तैयार किया है कि अगर बीच में कुछ समय बचेगा तो विद्यार्थियों को कहलूर रियासत के बारे में और अपने भाषा का महत्व के बारे में भी जागरूक किया जाएगा।
गौरतलब है कि बिलासपुर की कहलूर रियासत की कहानी दुनिया में प्रसिद्ध है। यहां पर स्थित रंगनाथ मंदिरों को देखने और इन मंदिरों पर अध्ययन करने के लिए पहुंचते है।
ऐसे में बंदला स्कूल में विद्यार्थियों को कहलूर रियासत के बारे में भी पढ़ाना, जिला की संस्कति को बढ़ावा देने के बराबर होगा।
जानकारी के अनुसार बिलासपुर की टाॅप पहाड़ी बंदला हर दष्टि से विकसित होती जा रही है।
देश के दूसरे हाइड्रो इंजीनियरिंग कालेज की बात हो या फिर पैराग्लाड़िंग की बात हो। यह क्षेत्र अपने सुंदर वातावरण और अपने बेहतर कार्याें को लेकर जिला का नाम रोशन कर रहा है।
अब बंदलाधार में ही स्थित राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला बंदला द्वारा कहलूरी भाषा में तैयार की गई प्रार्थना ने इस क्षेत्र की एक और अलग पहचान तैयार कर दी है।
अपने स्तर पर किए गए प्रयासों से अपनी भाषा को न केवल पुराना स्वरूप मिलेगा, बल्कि पहाड़ी राज्य अपनी भाषा को लेकर भी प्रमोट होगा।
प्रार्थना को कहलूरी में कंपोज करने वाले स्कूल के अध्यापक अभिषेक डोगरा का कहना है कि सुबह प्रार्थना सभा में विद्यार्थियों को कहलूरी बोली में विभिन्न विषयों पर बोलने का अवसर भी दिया जाता है।
इसमें जहां बिलासपुर की कहलुर रियासत के प्राचीन संदर्भ होते हैं वहीं जिले के प्रमुख मेलों का वर्णन भी किया जाता है।
इस संदर्भ में जब स्कूल प्रधानाचार्य मनोज कुमार से बात की गई तो उनका कहना है कि स्कूल प्रशासन ने अपने स्तर पर कहलूरी भाषा में स्कूल प्रार्थना को तैयार करवाया है। स्थानीय भाषा को प्रमोट करने के लिए स्कूल प्रबंधन कई अहम निर्णय लेता है।
उन्होंने इस नई शुरूआत को लेकर स्कूल प्रशासन और सभी स्कूल बच्चों को बधाई दी है।
उपायुक्त बिलासपुर आबिद हुसैन सादिक का कहना है कि कहलूरी भाषा में शुरू की गई प्रार्थना एक सराहनीय कार्य है।
उन्होंने स्कूल प्रबंधन को बधाई दी है और कहा है कि वह जल्द ही स्कूल में आएंगे।
