कुल्लू टूडे
बिलासपुर/कश्मीर ठाकुर
नगर के श्री लक्ष्मी नारायण मंदिर में चल रही श्रीमद भागवत कथा में प्रवचन करते हुए पंडित संदीपन वशिष्ठ ने भगवान श्रीकृष्ण जन्म और कंस-देवकी के भाई बहन के रिश्ते को लेकर कथा सुनाई।
उन्होंने बताया कि कंस हमारी भारतीय पौराणिक कथाओं के सबसे बड़े खलनायकों में से एक है। उसके पापकर्म इतने प्रबल, निष्ठुरता इतनी गहन और अत्याचार इतने अमानवीय थे कि द्वापर काल उसके नाम से कांप गया था।
अपनी ही बहन देवकी की सात संतानों की निर्मम हत्या कर उसने इतिहास में कंस मामा का नाम पाया। आज भी जब कोई मामा अपने रिश्तों की मर्यादा लांघता है, तो उसे कंस मामा की उपाधि दी जाती है।
उन्होंने कहा कि कंस वास्तव में अपनी बहन देवकी से बहुत ज्यादा स्नेह करता था। देवकी के प्रति उसका प्रेम इतना गहन था कि विवाह के बाद उसकी विदाई के समय स्वयं कंस ने अपनी बहन की डोली अपने कंधों पर उठाई थी।
देवकी की संतानों द्वारा मृत्यु को प्राप्त होने की आकाशवाणी के बाद कंस भयभीत हुआ और उसने ऐसे अत्याचार किए, जिनकी इतिहास में किसी से न तुलना की जा सकती है न ही कल्पना।
उन्होंने कहा कि धर्मप्रिय माता.पिता की संतान होते हुए भी उसमें ऐसी आसुरी प्रवृत्तियां कैसे जागृत हुई, जिस बहन को वह प्राणों से अधिक प्यार करता था, उस पर ही अत्याचार कैसे कर सका।
पौराणिक कथाओं के अनुसार कंस मथुरा के राजा उग्रसेन और रानी पद्मावती का पुत्र था। मथुरा नरेश उग्रसेन स्वभाव से अत्यंत धार्मिक थे। उनके राज्य का वातावरण हर तरह से धर्म के अनुकूल था।
कंस ने अपने पिता से राजगद्दी छीन स्वयं को राजा घोषित कर दिया।
अपने अभिभावकों को कारावास में डाल दिया और हर तरफ आतंक और अत्याचार का वातावरण बना दिया। सब दुर्गुणों के बावजूद कंस अपनी छोटी बहन देवकी से अपार स्नेह रखता था।
यदि देवकी केे विवाह के समय आकाशवाणी न हुई होती, तो वह कभी अपनी बहन पर मर्मांतक अत्याचार नहीं कर सकता था।
आयोजक रक्षा अवस्थी ने बताया कि यह आयोजन उनके स्वर्गीय पति विरेंद्र अवस्थी की पुण्य स्मृति में करवाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि 19 मई को अटूट भंडारे का आयोजन भी किया जाएगा।
