कुल्लू टूडे
बिलासपुर/कश्मीर ठाकुर
उतरी भारत के सुप्रसिद्ध धार्मिक तीर्थ स्थल एवं महाऋषि मार्कंडेय की तपोभूमि मार्कंडेय में लगे बैसाखी मेले में इस बार करीब साठ हजार श्रद्धालुओं ने आस्था की डुबकी लगाई। इस वर्ष श्रधालुओ की संख्या में पिछले वर्षो की तुलना में कमी देखी गई।
इस बार रात्री स्नान में श्रद्धालुओ ने बहुत कम रूचि दिखाई परन्तु दिन को श्रद्धालुओ का आने जाने का सिलसिला लगा रहा।
प्राप्त जानकारी के अनुसार इस बार मार्कंडेय में करीब पन्द्रह हजार श्रद्धालुओ ने ही रात्री स्नान किया जबकि दिन को यह संख्या बढ़ कर करीब चालीस हजार तक पहुंच गई।
मार्कंडेय में स्नान करने के लिए श्रद्धालु बिलासपुर, सोलन, शिमला, हमीरपुर, ऊना, मंडी व पडोसी राज्य पंजाब, हरियाणा व दिल्ली से पहुंचे थे।
श्रद्धालु अपने अपने वाहनों में परिवार व दोस्तों संग यहां पहुँच रहे थे और मार्कंडेय स्नान के बाद मार्कंडेय मंदिर में पूजा अर्चना करने के बाद वापिस अपने अपने घरो को लौट रहे थे।
जिला प्रशासन ने इस बार श्रद्धालुओ के लिए विशेष प्रबंध कर रखे थे जिसकी सारी जिम्मेवारी तहसीलदार सदर वीना ठाकुर के कंधे पर थी।
सभी श्रद्धालुओं के लिए पार्किंग और अन्य सुविधाएं उपलब्ध करवाई गई थी और स्वयं सहायता समूह को दो दुकानें निशुल्क उपलब्ध करवाई गई थी, जहां पर वह अपने उत्पाद बेचते नजर आए।
प्रशासन की तरफ से मेले के आयोजन को लेकर सभी प्रकार के प्रबंध पहले ही कर लिए गये थे परन्तु गसौड चौक पर इस बार ट्रैफिक व्यवस्था के लिए कोई भी पुलिस जवान नजर नही आए। जिसकी वजह से इस चैक पर दिन भर जाम की स्थिति बनी रही।
बस में आने जाने वाले श्रद्धालुओ के लिए गसौड चैक से मंदिर तक पैदल जाना पड़ता है और वापसी को भी उन्हें गसौड चैक से ही बस मिलती है।
मेले के लिए सवारियों को लाने ले जाने के लिए एचआरटीसी के साथ साथ कुछ निजी बसे भी लगी थी जो गसौड चैक से घागस तथा ब्रह्म्पुखर के लिए लगी थी।
एक्स्ट्रा बसे होने तथा लोगो द्वारा हर कहीं वाहन पार्क करने की वजह से गसौड चैक पर दिन भर जाम की स्थिति बनी रही। इसके अलावा इस मेले में किसी प्रकार की अभी तक कोई समस्या सामने नजर नही आई।
इस तीन दिवसीय मेले का गुरूवार को सदर एसडीएम अभिषेक कुमार गर्ग ने झंडा रसम के साथ शुभारम्भ किया था और शनिवार को इस मेले का कुश्ती के साथ समापन हो जायेगा।
गौरतलब है कि बैशाखी मेले में मार्कंडेय स्नान का विशेष महत्व है कहा जाता है जो कोई व्यक्ति बैशाखी वाले दिन मार्कंडेय जी का पवित्र स्नान करके महाऋषि मार्कंडेय मंदिर में पूजा अर्चना करता है उसे बहुत बड़े पुन्य की प्राप्ति होती है और पिछले जन्म के पापों से भी मुक्ति मिलती है।
महाऋषि मार्कंडेय को बाल देवता के रूप में पूजा जाता है यदि किसी के संतान न हो तो मार्कंडेय मंदिर में आकर संतान प्राप्ति की मन्नत मांगे तो उसे संतान प्राप्त हो जाती है।
इसके साथ ही यदि किसी का बच्चा बीमार रहता हो ऐसे में मार्कंडेय मंदिर में आकर उसके स्वस्थ होने की कामना करे तो वह बच्चा उसे बीमारी से निजात पाकर पूरी तरह से स्वस्थ हो जाता है।
