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कुल्लू टूडे

बिलासपुर/ कश्मीर ठाकुर

लाल चंद प्रार्थी के जीवन के सम्बन्ध में आने वाली पीढियां भी जानकारी रखें इसके लिए लाल चंद प्रार्थी ‘‘चाँद कुल्लवी’’ की जयंती के कार्यक्रम विद्यालयी स्तर पर भी आयोजित किए जायेंगे।

ये विचार आज निदेशक, भाषा एवं संस्कृति विभाग हिमाचल प्रदेश ने बिलासपुर में आयोजित लाल चंद ‘‘चाँद कुल्लवी’’ की जयंती के राज्य स्तरीय कार्यक्रम के प्रथम सत्र के उद्घाटन सत्र के अवसर पर व्यक्त किए।

उन्होंने कहा की हिमाचल कला संस्कृति भाषा अकादमी के कार्यों में गति लाने के हर सम्भव प्रयास किए जाएंगे।

उन्होंने कहा की शासकीय परिषद व् कार्यकारी परिषद् की निरंतर बैठकों को प्रभावी बनाया जाएगा ताकि साहित्यकार व कलाकारों से परस्पर सम्वाद कायम किया जा सके।

सांस्कृतिक भवन बिलासपुर के कलाकेन्द्र हाॅल में आयोजित कार्यक्रम के प्रातः कालीन सत्र में लेखक संगोष्ठी का आयोजन किया गया।

वरिष्ठ साहित्यकार एवं अकादमी के पूर्व सचिव सुदर्शन वशिष्ठ ने लाल चंद प्रार्थी का हिमाचल आकादमी को योगदान विषय पर अपना शोध पत्र प्रस्तुत किया।

प्रदेश के मशहूर कवि जाहिद अबरोल ने प्रार्थी की उर्दू पुस्तक वजूदो अदम का अर्थ स्पष्ट करते हुए कहा कि वजूद यानि अस्तित्व व अदम यानि अनअस्तित्व है जिसके इर्द गिर्द प्रार्थी की शायरी घुमती है। उनके सम्पूर्ण काव्य में कविता के प्रवाह के साथ-साथ दर्शन का भी बोध होता है।

चर्चा में डाक्टर ओम प्रकाश राही, डाक्टर सूरत ठाकुर, डाक्टर कमल के प्यासा, गंगाराम राजी, कृष्ण चंद्र महादेविया, हीरालाल ठाकुर, शंकर लाल वशिष्ठ, ने भाग लिया।

द्वितीय सत्र में रंग कर्मी संजय सूद द्वारा मुंशी प्रेम चंद की कहानी ‘‘बड़े भाई साहब’’ का मंचन किया गया।

शाम के सत्र में बहुभाषीय कवि समेल्लन का आयोजन किया गया। जिसमें कवियों ने पहाड़ी, हिंदी, उर्दू भाषा में विविध विषयों को छूती हुई कविताओं का पाठ किया।

प्रथम सत्र की अध्यक्षता डाक्टर प्रेम लाल गौतम ने की जबकि द्वितीय सत्र की अध्यक्षता में प्रभात शर्मा द्वारा की गई।

बहुभाषी कवि सम्मेलन में कुलदीप शर्मा, उमा ठाकुर, हरिप्रिया, जगदीश कपूर, जगतपाल नेगी, संदेश शर्मा, शिव प्रकाश पथिक, मुरारी शर्मा, रामलाल पाठक, निर्मल चंदेल, सुभाष साहिल, शांतिकुमार सियाल, जगजीत आजाद, अशोक दर्द, प्रीतम आलमपुर, चंचल सरोलवी, प्रताप पराशर, रविंद्र ठाकुर, कार्तिक शर्मा, दिलीप वशिष्ठ, नरेंद्र जिंटा, सचपाल, अशोक गौतम, रतन चंद निर्झर, रमेश चंद्र मस्ताना, प्रभात शर्मा, किशोर गौतम, प्रेम लाल गौतम, ने भी अपनी कविताओं का पाठ किया।

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