कुल्लू टूडे
बिलासपुर / कश्मीर ठाकुर
बीडीटीएस के पूर्व कंट्रोलर ध्यान सिंह ठाकुर ने सरकार की मध्यस्थता में हुई बैठक पर बरमाना सभा प्रबंधन पर सवाल उठाए है।
बरमाना बीडीटएस प्रबंधन ने महासभा में स्वयं 12.04 रुपए रेट तय करवाने की हामी भरी थी अब वह इस रेट पर कैसे सहमत हुए। आज 68 दिनों के बाद ट्रांसपोर्टरों को जो रेट का झुनझुना ट्रांसपोर्टरों के हाथ थमाया है वह मंजूर नहीं है।
उन्होंने कहा कि इस बैठक में मांग रखी थी कि ऑपरेटरों को 6 चक्की टायर का भाड़ा ₹11 .41 पैसे होना चाहिए और इस भाड़े से 5% लैस मल्टी एक्सल का ढलाई भाड़ा तय होना चाहिए था। इससे कम रेट ट्रांसपोर्टरों के लिए मान्य नहीं होंगे। उन्होंने कहा कि लोगों की भावनाओं से खिलवाड़ हुया है।
आज सीमेंट उद्योगों को 68 दिन बंद होने के बाद अभी तक भी फैक्ट्रियों के ताले नहीं खुल पाए हैं। जहां संघर्ष लंबा खींच रहा है वहीं ट्रक ऑपरेटर पीछे नहीं हटेंगे।और एक निर्णायक लड़ाई लड़ेंगे।
उन्होंने इस मुददे पर अडानी समूह की हठधर्मिता पर रोष व्यक्त किया और सरकार से इस मामले में हस्तक्षेप करते हुए समाधान करवाए जाने की वकालत की।
उन्होंने कहा कि आपरेटरों को तय किए गए फार्मुले के तहत ढुलाई रेट 12 .04 रूपए मिलना चाहिए था लेकिन अडानी समूह अल्ट्राटैक कंपनी द्वारा निर्धारित 10.30 रूपए रेट देने पर भी सहमत नहीं।
ऐसे में समझ नहीं आ रहा कि अडानी समूह की मंशा क्या है जो रेट अदानी समूह तय कर रहा है। इस रेट में सिंगल एक्सेल व मल्टी ऑपरेटरों का सरवाइव होना बहुत मुश्किल है। इसी रेट पर ट्रांसपोर्टरों का सरवाइव होना खतरे से खाली नहीं है।
बीडीटएस के पूर्व प्रधान जीत राम गौतम, ध्यान सिंह ठाकुर, राजेश ठाकुर, कश्मीर सिंह चंदेल, बालकराम कपिल, रामकुमार शर्मा, सुभाष कपल्स, रतन लाल ठाकुर ने सरकार की मध्यस्था में होने वाली बैठक में अडानी समूह से लोगों के हितों का ध्यान रखते हुए ही फैसला लेने की मांग रखी थी ।
उन्होंने कहा कि जहां आज 68 दिन के हुए फैसले से ट्रांसपोर्टरों को जश्न मनाना चाहिए था वहां आज लोग दसवें दिन में पक्का मोर्चा धरने को त्याग कर चले गए।
