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कुल्लू टूडे

बिलासपुर/कश्मीर ठाकुर

अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के सचिव तथा पूर्व सीपीएस राजेश धर्माणी ने भाजपा नेताओं द्वारा लगाए गए आरोपों के मद्देनजर उन पर पलटवार किया है।

पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा कि जो भी आरोप उन्होंने भाजपा के नेताओं पर लगाए थे वह मनगढ़ंत नहीं थे बल्कि आरटीआई द्वारा ली गई जानकारी के आधार पर लगाए गए थे।

उन्होंने कहा कि बिना किसी काम के 12 करोड़ रुपयों के ठेके देना भ्रष्टाचार का जीता जागता नमूना है। जिसको छुपाने के लिए अब भाजपा के नेता अनापशनाप बयान बाजी कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि 5 साल पहले जब प्रदेश में भाजपा सरकार का गठन हुआ था तो उस समय मुख्यमंत्री ने कहा था कि कोई भी भाजपा का पदाधिकारी ठेकेदारी नहीं करेगा। लेकिन हालत यह है कि इस समय सभी पदाधिकारी ठेकेदारी कर रहे हैं और करोड़ों रुपए के घोटाले करते हुए कमाई कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा के जिला महासचिव और उनकी पत्नी के नाम ही 116 टेंडर आवंटित हुए थे, यह सूचना आरटीआई के माध्यम से ली थी।

उन्होंने कहा कि कुछ कार्य ऐसे इस दौरान आवंटित किए गए जो मिट्टी खुदाई से संबंधित थे, कच्ची नालियों से संबंधित थे और सड़क के शोल्डर को ठीक करने के लिए टेंडर कॉल किए गए थे।

उन्होंने कहा कि इस तरह फर्जी कार्य हुआ है। और अब जब इनकी चालाकी पकड़ी गई है तो यह बिना मतलब की बयानबाजी कर रहे हैं। भाजपा नेताओं द्वारा किए गए भ्रष्टाचार की एक बहुत लंबी सूची है जिसमें भाजपा के कई पदाधिकारी हैं।

उन्होंने कहा कि जांच करवाने का जहां तक विषय है उसके बारे में उच्च न्यायालय को इसलिए कहा गया था क्योंकि सरकार पर जांच करवाने का कोई भरोसा नहीं है।

उन्होंने कहा कि इसीलिए हमने उच्च न्यायालय को संज्ञान लेने की बात कही थी और उसकी निगरानी में जांच करवाए जाने की बात कही थी।

धर्माणी ने कहा कि इन्होंने कांग्रेस कार्यकाल में गलत कार्य करने की बात कही तो अगर ऐसा कुछ हुआ था तो 5 साल तक सरकार कहां सोई रही। इसकी जांच क्यों नहीं करवाई और अगर ऐसा था तो कार्यवाही करते और दोषी पाया जाता तो उनके खिलाफ एक्शन लेते लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ। अब अपने गलत कारनामों पर पर्दा डालने के लिए इस तरह की बातें कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि सरकार को करोड़ों रुपयों का चूना लगाकर अधिकारियों को डरा धमका कर यह गलत कार्य किए गए हैं और सबसे अधिक गलत कार्य राजेंद्र गर्ग के मंत्री बनने के उपरांत ही हुए हैं जो 12 करोड़ रुपए इन ठेकेदारों में बिना काम के बांटे गए उससे किसी गांव को सड़क बनती तो हजारों लोगों को लाभ होता। उन्होंने कहा कि इस तरह के टेंडर हिमाचल प्रदेश में पहली बार हुए हैं।

उन्होंने कहा कि कमाना कोई बुरी बात नहीं लेकिन ईमानदारी से कमाया जाए तो ज्यादा बेहतर होता है। इस तरह की घोटाले बाजी करके कमाने पर निश्चित रूप से जांच होना आवश्यक है क्योंकि यह आम जनता के पैसों को चूना लगाया गया है।

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