कुल्लू टुडे
कुल्लू
दशहरा उत्सव के 300 साल के इतिहास में पहली बार ऐसा षडयंत्रकारी खेल हुआ है। कि ढालपुर के दो सबसे बड़े मैदान – खेल मैदान और रघुनाथ कैंप मैदान – एक ही व्यक्ति को बेच दिए गए हैं।
जिस ढालपुर में हर बार प्लॉट की खुली नीलामी होती थी, जहां देशभर का व्यापारी आकर अपना हक खरीदता था, वहां इस बार पूरा मैदान ही एक आदमी को सौंप दिया गया। सिर्फ प्रदर्शनी मैदान को नीलामी के नाम पर खुला रखा गया, बाकी सब एक के कब्जे में।
*मैदान नहीं, व्यापारियों की लूट का ठेका बेचा गया*
दोनों मैदान एक ही ठेकेदार के हाथ में जाने के बाद व्यापारियों की लूट शुरू हो गई है।
आरोप है कि ठेकेदार प्लॉट के ऊंचे-ऊंचे रेट मांग रहा है। व्यापारी ठेकेदार की शर्तों पर प्लॉट खरीदने से साफ इनकार कर रहे हैं।
इतना ही नहीं बल्कि एक व्यक्ति को बेचे मैदान में दशहरा कमेटी द्वारा नीलामी से कुछ प्लाट बेच भी दिए थे। जिन्हें बाद में रद्द कर दिया गया।
नतीजा सबके सामने है – दशहरा शुरू होने में 2 दिन बाकी हैं, और दोनों बड़े मैदान सूने पड़े हैं। ढालपुर मैदान में बाजार अभी तक नहीं सजा है।
किसके इशारे पर तोड़ी गई दशकों पुरानी परंपरा?
सवाल यह है कि आज तक जिला प्रशासन खुद प्लॉट बनाकर नीलाम करता था, फिर इस बार किसके कहने पर पूरी व्यवस्था को रौंदकर दो मैदान एक ही व्यक्ति को बेच दिए गए?
जनता और व्यापारी वर्ग का सीधा आरोप है कि यह नई रिवायत किसी बड़े प्रभावशाली व्यक्ति के दबाव में शुरू की गई है। दशहरा आयोजन कमेटी (प्रशासन) को भी किनारे कर दिया गया।
*डीसी ने पल्ला झाड़ा, बोले-मेरे ज्वाइन करने से पहले हुआ फैसला*
वहीं इस बारे उपायुक्त डॉ. अमित कुमार शर्मा से सवाल पूछा, तो उन्होंने साफ कह दिया कि यह फैसला मेरे कुल्लू ज्वाइन करने से पहले हो गया था, इसमें मेरा कोई रोल नहीं है।
यानी डीसी ने माना कि फैसला उनके आने से पहले ही हो चुका था,जिसकी मुझे पूरी जानकारी नहीं है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि फैसला दशहरा कमेटी की बैठक में हुआ, लेकिन खंगालने पर कमेटी की किसी भी खुली बैठक में ऐसा फैसला मिला ही नहीं।
*प्लॉट कमेटी अध्यक्ष ने भी खोली पोल – ‘ऊपर से हुआ फैसला’*
प्लॉट आवंटन कमेटी के अध्यक्ष रोहित शर्मा से जब पूछा गया तो उन्होंने भी हाथ खड़े कर दिए। उनका साफ कहना था – दो मैदान बेचने का फैसला ऊपरी स्तर पर लिया गया है, इसमें मेरी कोई भूमिका नहीं है।
यानी डीसी और कमेटी अध्यक्ष दोनों एक ही बात कह रहे हैं – फैसला ऊपर से आया है। फिर ऊपर कौन है? दशहरा कमेटी का अध्यक्ष? या कोई और बड़ा नाम जिसे बचाने की कोशिश हो रही है?
*खाली मैदान चीख-चीख कर बोल रहा है – एक व्यक्ति से क्यों हुआ*
अभी भी खेल मैदान और रघुनाथ कैंप मैदान खाली पड़े हैं। व्यापारी आना नहीं चाहते, क्योंकि एक ही आदमी मनमानी रेट वसूल रहा है।
दशहरा उत्सव पर इसका सीधा असर पड़ेगा। अगर मैदान ही नहीं सजे, तो उत्सव कैसा?
यह पहला मौका है जब दशहरा कमेटी के इतर, दशहरा के नियमों को ताक पर रखकर ढालपुर के दो टुकड़े एक ही व्यक्ति को बेचे गए। इसके पीछे जो भी हो, उसने दशहरा की आत्मा को बेचने का काम किया है।

