कुल्लू टुडे
कुल्लू
देव सदन कुल्लू के सभागार में बीते दिनों को हिमाचली लोक साहित्य, लोक संगीत एवं संस्कृति के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले प्रसिद्ध गीतकार एवं संगीतकार आदरणीय श्री के. आर. पंछी जी को समर्पित “एक शाम पंछी के नाम” कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया गया।
कार्यक्रम में कलाकारों ने पंछी जी की लोकप्रिय रचनाओं को अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से जीवंत कर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
कार्यक्रम की शुरुआत स्वागत उद्बोधन एवं कार्यक्रम की जानकारी के साथ हुई। इसके बाद कलाकारों ने पंछी की रचनाओं पर आधारित एक से बढ़कर एक प्रस्तुतियां दी।
जिसमें पं० विद्या सागर एवं निशांत गौतम के निर्देशन में सूत्रधार कला संगम के कलाकार ट्विंकल, अनुष्का, अर्पिता ठाकुर, तारा, रेखा, संजय पुजारी, जीवन बुडाल, लाल सिंह, विजय, दिनेश एवं एके अनुपम ने अपनी प्रस्तुतियों से दर्शकों का मनोरंजन किया।
वहीं संगीत सदन मंडी के संगीत गुरु उमेश भारद्वाज के शिष्य कलाकार उर्मिला, दुर्वा, सुनीता, अनुपमा, एकता, आदित्य, सर्वज्ञ शर्मा तथा ओल्ड बॉयज मण्डी के वरिष्ठ कलाकार रामपाल शर्मा, नित्यदर्शी वैद्य, मोहिंदर पाल वैद्य, जगदीश कपूर, रविकांत कपूर, हेमंत गुप्ता, विनोद चौधरी एवं आकाश ने अपनी प्रस्तुतियों से कार्यक्रम में रंग भर दिया। साथ ही नृत्य प्रस्तुतियों ने भी दर्शकों की खूब वाहवाही बटोरी।
कार्यक्रम के दौरान मुख्यातिथि व विशेष अतिथियों का स्वागत सम्मान कुल्लवी परम्परा अनुसार शाल, टोपी व स्मृति चिन्ह भेंट कर किया गया।
सूत्रधार कला संगम के अध्यक्ष दिनेश सेन ने अपने स्वागत भाषण में कार्यक्रम में पधारे मुख्यातिथि, विशेष अतिथियों, मेहमान कलाकारों, पत्रकार बंधुओं व सभी दर्शकों का स्वागत किया गया।
कार्यक्रम में मुख्यातिथि के रूप में उपस्थित बंजार विधानसभा विधायक ने कहा कि सूत्रधार कला संगम, जिला कुल्लू ने अपने गौरवशाली 49 वर्ष पूर्ण कर स्वर्ण जयंती वर्ष में प्रवेश किया है।
कला, संस्कृति, साहित्य एवं लोक परंपराओं के संरक्षण और संवर्धन के लिए संस्था द्वारा किए जा रहे निरंतर प्रयास निश्चित रूप से सराहनीय एवं प्रेरणादायी हैं।
उन्होंने कहा कि बंजार विधानसभा क्षेत्र की ग्राम पंचायत मंगलौर के मजां गांव से संबंध रखने वाले प्रसिद्ध गीतकार एवं संगीतकार श्री के. आर. पंछी का सानिध्य प्राप्त होना गौरव की बात है।
अपनी कला एवं संगीत के माध्यम से उन्होंने हिमाचल की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को नई पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
उपस्थित वरिष्ठजनों एवं संस्था से जुड़े पदाधिकारियों ने हिमाचल की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को संजोने तथा आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने के सामूहिक दायित्व पर अपने विचार साझा किए।
कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण “सूत्रधार कला रत्न सम्मान” रहा, जिसके अंतर्गत के. आर. पंछी को सम्मानित किया गया। इन्हें कुल्लवी परम्परा अनुसार शाल, टोपी, स्मृति चिन्ह व सूत्रधार कला रत्न सम्मान भेंट किया गया।
इनके सम्मान में सूत्रधार कला संगम के प्रचार प्रसार सहप्रभारी व लोक गायक धर्मेन्द्र शर्मा द्वारा के. आर. पंछी जी के सम्मान में विशेष रूप से रचित गीत “गीता रचनू आला रागा न बोसु, न आला म्हारे शोभले पंछी हो के. आर. पंछी” की विशेष प्रस्तुति दी गई । इस दौरान उपस्थित दर्शकों ने तालियों की गड़गड़ाहट से कलाकारों का उत्साहवर्धन किया।
कार्यक्रम में संगीत सदन मण्डी के गुरू उमेश भारद्वाज एवं सूत्रधार संगीत अकादमी प्राचार्य पं० विद्या सागर को भी विशेष सम्मान प्रदान किया गया। इसके साथ ही अतिथि कलाकारों का भी सम्मान किया गया।
मुख्यातिथि ने कहा कि सूत्रधार कला संगम की 49 वर्षों की गौरवशाली यात्रा कला एवं संस्कृति के प्रति समर्पण की एक प्रेरणादायी मिसाल है ।
संस्था के स्वर्ण जयंती वर्ष में प्रवेश पर उन्होंने समस्त पदाधिकारियों, सदस्यों एवं कला प्रेमियों को हार्दिक शुभकामनाएं एवं बधाई दी।
“एक शाम पंछी के नाम” कार्यक्रम ने जहां वरिष्ठ रचनाकार के कला एवं सांस्कृतिक योगदान को सम्मान दिया।
वहीं हिमाचली लोक संगीत, साहित्य और लोक परंपराओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का भी सार्थक संदेश दिया। कार्यक्रम के दौरान सभागार तालियों की गड़गड़ाहट और हिमाचली लोकधुनों से गूंजता रहा।
