कुल्लू टुडे
बिलासपुर, कश्मीर ठाकुर
गर्मियों के मौसम में प्रदेश के गर्म जिला बिलासपुर के जंगलों का धधकना कोई नई बात नहीं है, हर साल वन आग की भेंट चढ़ते हैं और हर साल आग पर नियंत्रण के लिए तैयार होने वाली विभागीय एक्सरसाईज औंधे मुंह गिरती है।
बिलासपुर नगर सुशोभित बंदला धार और इसके साथ की पहाड़ियां एक बार फिर भीषण आग की चपेट में है।
चंगर सेक्टर के साथ लगते ओयल, दनोह, धमणा, आदि गांवों में पशु पक्षियों की चिल्लाने की आवाजें सहज ही सुनी जा सकती है।
बड़े पक्षी या पशु अपने बचाव के लिए इधर उधर भाग सकते हैं लेकिन घोंसलों में बैठे मासूमों का आग की भेंट चढ़ना स्वाभाविक है। इस जघन्य पाप के लिए कोई भी जिम्मेवार हो।
लेकिन इसकी जिम्मेवारी सभ्य समाज और तंत्र को लेनी ही होगी। इन जंगलों में दिनरात लगी आग का राख और धुएं का गुबार नगर में देखा जा सकता है।
असंख्या पशु पक्षियों के जिंदा जलने के साथ-साथ वन संपदा का नुकसान हर साल की बात है, इस प्रकार की घटनाओं से तापमान में भी अप्रत्याशित वृद्धि हो रही है।
यह आग कौन लगाता है, कब लगाता है, इसका कोई पता नहीं चल पाता है, लेकिन धधकते जंगल और तेजी से फैलती आग के आगे सब नतमस्तक हैं।
बताया जाता है कि नए घास के लिए यह आग जानबूझ कर लगाई जाती है लेकिन चंद पशुओं के घास के लिए लगाई जाने वाली आग हजारों जानवरों और पक्षियों के लिए मौत का संदेश लेकर आती है, इस ओर कोई नहीं सोचता। अपनी गर्ज के लिए असंख्य बेजुबानों की बलि का देना कहां तक उचित है।
हैरानी यह भी है कि इस आगजनी की घटना में संभवतया कागजी औपचारिकताओं की पूर्ति होती हो लेकिन किसी को कठोर सजा का न होना भी इस प्रकार की घटनाओं को बढ़ावा देता है।
विभाग वन संरक्षण के लिए समस्त जनता, युवा मंडल, महिला मंडलों, सांझा वन प्रबंधन समितियों, वन विकास समितियों तथा गैर सरकारी संगठनों से अपील तो हर साल करता है।
लेकिन वन भी हर साल ही जलते हैं। यहीं नहीं प्रत्येक बीट स्तर पर सामुदायिक कार्यशालाएं, जनजागरूकता कार्यक्रम तथा अन्य गतिविधियां नियमित रूप से आयोजित की गई तथा जिला में 45 फायर वॉचर्स की तैनाती संवेदनशील क्षेत्रों पर नजर बनाने के लिए हुई है।
बावजूद इसके जंगल जले और जल रहे हैं। रात के समय इस आग का भयावह मंजर किसी के भी मन को प्रभावित करता है।
नगर के प्रबुद्ध बुद्धिजीवी सरदार रच्छपाल सिंह, सुरेंद्र गुप्ता, जसजीत वालिया, राजेश महाजन, आशुतोष, अनीश, विशाल, नवदीप, संदीप व सुमित आदि का कहना है कि हर साल होने वाली इस प्रकार की आगजनी की घटनाओं से संज्ञान लेने की आवश्यक्ता है तथा इन घटनाओं की पुनर्रावृति न हो इसके लिए विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों की जबावदेही तय होनी चाहिए।
