कुल्लू टुडे
बिलासपुर, कश्मीर ठाकुर
सलापड़ से लगभग 13 किलोमीटर दूर स्थित कसोल गांव अब कोल डैम के माध्यम से एक उभरते पर्यटन हब के रूप में विकसित होने की दिशा में अग्रसर है। इस मुहिम को गति देने में कसोल विकास मंच लगातार प्रयासरत है।
मंच के संयोजक डॉ. प्रकाश चंद ठाकुर क्षेत्र को पर्यटन की दृष्टि से विकसित कर एक आदर्श मॉडल विलेज के रूप में स्थापित करना चाहते हैं।
जिससे स्थानीय लोगों को रोजगार के नए अवसर मिलें और क्षेत्र को एक अलग पहचान प्राप्त हो। डॉ ठाकुर की यह सोच नई नहीं है बल्कि वे लंबे समय से इस दिशा में कार्य कर रहे हैं।
हाल ही में उन्होंने करीब अढ़ाई दशक पूर्व की एक पुरानी तस्वीर साझा की जिसमें एनटीपीसी के सीएमडी सीपी जैन दिल्ली से अपनी टीम के साथ विस्थापितों की समस्याएं सुनने क्षेत्र में पहुंचे थे।
उस समय भूमि अधिग्रहण से जुड़ी प्रक्रियाएं चल रही थीं और प्रभावित परिवारों की समस्याओं का सर्वे किया जा रहा था।
इस दौरान डॉ. प्रकाश चंद ठाकुर ग्रामीणों का प्रतिनिधित्व करते हुए उनकी समस्याएं अधिकारियों के समक्ष रख रहे थे। यह वह दौर था जब सोशल मीडिया का प्रभाव नहीं था और संचार के सीमित साधन ही उपलब्ध थे।
यदि कोल डैम परियोजना के शुरुआती दौर को याद किया जाए तो उस समय भी डॉ. ठाकुर ने जमीनी स्तर की समस्याओं को प्रमुखता से उठाया था। उस वक्त उनकी उम्र लगभग 34 वर्ष थी। लेकिन क्षेत्र के विकास को लेकर उनकी सोच और सक्रियता बेहद परिपक्व थी।
डॉ. प्रकाश चंद ठाकुर का सामाजिक जुड़ाव बचपन से ही रहा है। मात्र 14-15 वर्ष की आयु में ही उन्होंने गांव और आसपास के क्षेत्रों में विभिन्न सामाजिक व सांस्कृतिक गतिविधियों में भाग लेना शुरू कर दिया था।
स्कूल कार्यक्रमों, रामलीला, युवा महोत्सव और 26 जनवरी जैसे आयोजनों में उनकी भागीदारी हमेशा अग्रणी रही।
वर्ष 1981 में कसोल सहित आसपास के क्षेत्रों में बिजली पहुंचाने के प्रयास हों या 1996 में तत्कालीन डीसी तरुण धर के कार्यकाल में सड़क निर्माण को लेकर पहल, हर महत्वपूर्ण कार्य में उनकी सक्रिय भूमिका रही है। आज भी वे उसी ऊर्जा और लग्न के साथ क्षेत्र के विकास में जुटे हुए हैं।
अब उनका लक्ष्य कोल डैम के माध्यम से कसोल और आसपास के क्षेत्र को पर्यटन की दृष्टि से विकसित करना है ताकि यह इलाका देश के पर्यटन मानचित्र पर अपनी पहचान बना सके।
जिसके लिए वे विधायक त्रिलोक जम्वाल के माध्यम से केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा से भी मिलेंगे, वे एक ऐसे मॉडल विलेज की कल्पना कर रहे हैं जहां विकास, रोजगार और स्थानीय संस्कृति का संतुलित समावेश हो।
