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कुल्लू टूडे

कुल्लू

जिला मुख्यालय पर ढालपुर की माल रोड में पहली बार आयोजित किया जा रहा कुल्लू महोत्सव फ़िलहाल तो पूरी तरह से फ्लॉप शो लग रहा है। शुभारंभ के मौके पर माल रोड में हालांकि कनोपियाँ पूरी तरह से सज गई है।

लेकिन दो-तीन दुकानों को छोड़कर लगभग तमाम दुकानें खाली पड़ी हुई है। वहीं, माल रोड को सजाने का काम भी अभी आधा अधूरा ही हुआ है। लेकिन उसके बावजूद भी कुल्लू के विधायक कुल्लू महोत्सव का शुभारंभ कर गए।

उल्लेखनीय है कि बुधवार 25 दिसंबर से 31 दिसंबर तक ढालपुर के माल रोड में कुल्लू महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है। इसी तर्ज पर धार्मिक पर्यटन नगरी मणिकरण घाटी में स्थित मिनी इजरायल के नाम से प्रसिद्ध कसोल में भी कसोल कार्निवाल का आयोजन 25 दिसंबर से ही किया जा रहा है।

ऐसे में जिला मुख्यालय पर आयोजित किये जा रहे कुल्लू महोत्सव के आयोजन का फ़िलहाल कोई महत्व नहीं रह गया लगता है। जहां न तो स्थानीय लोगों की भागेदारी थी और न ही सैलानियों की मौजूदगी देखने को मिली।

क्योंकि बुधवार को कुल्लू महोत्सव के शुभारंभ अवसर पर जहां तमाम दुकानें खाली थी। वहीं लोगों की उपस्थिति भी बहुत कम रही। उनमें भी कांग्रेस पार्टी के कार्यकर्ता व नगर परिषद के कर्मी ज्यादा थे। जिसमें सैलानियों की मौजूदगी न के बराबर रही। वहीं, मंच के सामने लोगों को बैठने के लिए कुर्सियां भी मात्र 100 के लगभग लगाई गई है।

ऐसे में अगर लोग भारी संख्या में सांस्कृतिक कार्यक्रम देखने आते हैं तो निश्चित तौर पर उन्हें कड़ाके की ठंड में खड़े होकर कार्यक्रम देखना पड़ेगा। इसके अलावा आयोजन स्थल पर लोगों को बैठने के लिए किसी भी तरह की व्यवस्था नहीं की गई है।

जिससे एक बात तो साफ हो रही है कि नगर परिषद यह आयोजन किसी खास विवशता के चलते कर रही है। जबकि इस तरह के आयोजन के लिए लगभग एक माह पूर्व मीडिया सहित अन्य माध्यमों से प्रचार होना चाहिए था। ताकि इस आयोजन में सैलानियों की सहभागिता भी सुनिश्चित की जा सकती थी।

लेकिन जिस तरह से आनन फानन में कुल्लू महोत्सव के आयोजन का ताना बाना एक सप्ताह में बुना गया। निश्चित तौर पर यह आयोजन किसी खास वजह से नगर परिषद के गले मढ़ दिया गया है। जिसे महज औपचारिकता वश पूरा किया जा रहा है।

फिलहाल देखना यह
है कि आने वाले दिनों में कुल्लू महोत्सव कितना सफल कितना या असफल होता है?

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