कुल्लू टूडे
बिलासपुर, कश्मीर ठाकुर
बिलासपुर के श्री लक्ष्मी नारायण मंदिर में मंदिर न्यास के तत्वावधान में चल रही श्रीशिव महापुराण कथा के अंतिम दिन कथावाचक पंडित सुशील कुमार ने भगवान शिव के अवतारों के बारे में श्रद्धालुओं को बताया।
उन्होंने कहा कि हिन्दू धर्म में भगवान विष्णु और शिव के कई अवतार हैं। सभी उनकी अलग रूपों में पूजा करते हैं। ऐसे ही अवतारों में से एक है भगवान शिव का अर्धनारीश्वर अवतार।
उन्होंने बताया कि भगवान शिव का यह अवतार शिव और उनकी पत्नी माता पार्वती का मिला.जुला स्वरूप है।
भगवान शिव का यह अवतार स्त्री और पुरुष दोनों की सम्मिलित ऊर्जा का प्रतिनिधित्व करता है।
उन्होंने बताया कि शास्त्रानुसार इस ब्रह्मांड में सब कुछ अर्धनारीश्वर से ही उत्पन्न होता है और अपने जीवनकाल के पूरा होने के बाद अर्धनारीश्वर में वापस चला जाता है।
उन्होंने बताया कि एक बार माता पार्वती ने भगवान शिव से प्रार्थना की कि उन्हें शिव में ही समाहित होना है और वो उन्हें ऐसी अनुमति दें।
उस समय भगवान शिव ने पार्वती माता की यह प्रार्थना स्वीकार की और अर्धनारीश्वर स्वरूप का अवतरण हुआ।
स्कन्द पुराण के अनुसार एक बार जब राक्षस अंधक ने माता पार्वती को पकड़ लिया उस समय विष्णु जी ने उन्हें बचाया और उन्हें अपने निवास स्थान पर ले आए।
जब राक्षस ने वहां उनका पीछा किया, तब माता पार्वती ने अपना अर्धनारीश्वर रूप प्रकट किया।
उनका ऐसा रूप देखकर जिसमें आधा हिस्सा पुरुष का और आधा हिस्सा महिला का था उस समय अंधक ने उनका पीछा छोड़ दिया।
उन्होंने बताया कि भगवान शिव का अर्धनारीश्वर स्वरूप इस बात का प्रतीक है कि पुरुष और स्त्री सिद्धांत अविभाज्य हैं।
अर्धनारीश्वर स्वरूप का आधा हिस्सा पुरुष और दूसरा आधा हिस्सा स्त्री का प्रतीक है।
इसमें से पुरुष सिद्धांत और ब्रह्मांड की निष्क्रिय शक्ति है, जबकि प्रकृति स्त्री सक्रिय शक्ति है दोनों एक साथ मिलकर ही सृष्टि का निर्माण करते हैं और इसी से ब्रह्माण्ड का निर्माण होता है।
यह स्वरूप इस बात का संकेत देता है कि स्त्री और पुरुष एक दूसरे की शक्ति के बिना अधूरे हैं और उनकी ऊर्जा भी अर्थहीन है।
ऐसा माना जाता है कि यदि आप भगवान शिव के अर्धनारीश्वर स्वरूप की पूजा करती हैं तो उससे पूजा का दोगुना फल मिलता है।
इस पूजा से शिव और पार्वती दोनों की पूजा का एक साथ फल मिलता है और मनोकामनाओं की पूर्ति होती है।
मंदिर पुजारी पंडित बाबू राम शर्मा ने बताया कि कथा समापन के बाद अटूट विशाल भंडारे का आयोजन किया गया। जिसमें सैंकड़ों लोगों ने प्रसाद ग्रहण किया।
