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कुल्लू टूडे

बिलासपुर, कश्मीर ठाकुर

जिले के घुमारवीं में संपन्न हुई अनुसूचित जाति, जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक वर्ग संयुक्त संघर्ष मोर्चा की बैठक में पारित प्रस्तावों की जानकारी देते हुए मोर्चा के जिलाध्यक्ष एवं सेवानिवृत डीएसपी सीताराम कौंडल ने बताया कि कुछ विशेष लोगों द्वारा संविधान को बदलने की बात की जा रही है, जो संविधान प्रत्येक नागरिक को समानता, बिना जाति भेद के सबको शिक्षा के समान अधिकार, धर्मनिरपेक्षता, संप्रभुत्व, भाईचारा, एकता, अखंडता, लोकतंत्र सबको समानता का अधिकार देता है, मोर्चा उन ताकतों का घोर विरोध करता है जो संविधान को बदलने की बात करते हैं।

उन्होंने कहा कि मोर्चा संविधान को छेड़छाड़ करना बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं करेगा।

उन्होंने कहा कि संयुक्त संघर्ष मोर्चा सरकार से अनुरोध करता है की अनुसूचित जाति जनजाति विशेष निधि जो उप योजना सरकार द्वारा वर्ष 1980 से आरंभ की गई थी।

उस धनराशि से 25 प्रतिशत अनुसूचित जाति तथा 8 प्रतिशत अनुसूचित जनजाति के विकास हेतु खर्च करने के लिए विशेष निधि कानून बनाया जाए ताकि उक्त धनराशि का आवंटन इन्हीं समुदाय के विकास कार्यों जैसे शिक्षा स्वास्थ्य अनुसूचित जाति बस्तियों में सड़कों का निर्माण करने हेतु तथा शिक्षा में छात्र.छात्राओं को देश और विदेश में उच्च शिक्षा प्राप्त करने हेतु विशेष छात्रवृति का प्रावधान किया जाए या कानून तेलगाना राज्य के अनुसार बनाया जाए।

क्योंकि पहले यह बजट 25 प्रतिशत सरकार द्वारा किया गया था, किंतु अब इसे बहुत कम कर दिया गया है और उसे बजट को भी अनुसूचित जाति जनजाति के विकास हेतु खर्च न करके अन्य कार्यों में डायवर्ट किया जा रहा है जो इस समुदाय के साथ अन्याय है।

इसलिए संयुक्त संघर्ष मोर्चा मांग करता है कि राजस्थान की तर्ज पर हिमाचल प्रदेश में भी अनुसूचित जाति जनजाति विशेष निधि कानून बनाया जाए।

सीता राम कौंडल ने कहा कि संविधान में अनुसूचित जाति जनजाति अन्य पिछड़ा वर्ग को जो सरकारी नौकरियों में आरक्षण दिया गया है उसकी सरकार समाप्त कर रही है।

सार्वजनिक क्षेत्र का निजीकरण करके आरक्षण समाप्त किया जा रहा है तथा अन्य एसएमसीपीटीए मल्टी टास्क वर्कर इत्यादि की भर्ती बंद की जाए और संविधान के अनुच्छेद 16,4,16,के तथा रोस्टर के अनुसार विभागों में भर्ती की जाए तथा 85वां संशोधन को लागू किया जाए ताकि संविधान के अनुरूप अनुसूचित जाति जनजाति अन्य पिछड़ा वर्ग को न्याय मिल सके।

उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश धार्मिक स्वतंत्रता कानून 2019 तथा हिमाचल प्रदेश धार्मिक स्वतंत्रता का कानून संख्या 15 जो 12, 8, 2022 को विधानसभा में पारित किया गया है।

इसको समाप्त किया जाए क्योंकि संविधान के मुताबिक सभी नागरिकों को धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार प्राप्त है जो संविधान की मूल भावना बाधार्मिक स्वतंत्रता पर कुठाराघात है कर्नाटक प्रदेश की नई कांग्रेस सरकार द्वारा जो कर्नाटक में पिछली सरकार द्वारा बनाया गया धार्मिक स्वतंत्रताकानून को रद्द कर दिया है।

संघर्ष मोर्चा द्वारा पहले भी सरकार को इस कानून को रद्द करने हेतु प्रस्ताव भेजा गया है।

संयुक्त संघर्ष मोर्चा इस कानून का घोर विरोध करता है जो धार्मिक स्वतंत्रता को समाप्त करता है।

उन्होंने कहा कि अनुसूचित जाति जनजाति अन्य पिछड़ा वर्ग के समुदायों जो भूमिहीन है उन्हें सरकार द्वारा पांच बीघा भूमि उपलब्ध कराई जाए तथा जिन लोगों की भूमि व मकान भारी बारिश के कारण जमींदोज हो गए हैं।

उन परिवारों को भवन निर्माण हेतु कम से कम 10 बिस्वा भूमि उपलब्ध कराने का संयुक्त संघर्ष मोर्चा सरकार से अनुरोध करता है।

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