कुल्लू टूडे
हमीरपुर
बिजली बोर्ड कर्मचारी यूनियन के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष कुलदीप खरवाड़ा ने जानकारी देते हुए बताया कि हिमाचल प्रदेश बिजली बोर्ड में तैनात किए गए तमाम प्रबंध निदेशकों ने कर्मचारी हितों को दरकिनार करते हुए केवल अपने पद पर बने रहने के लिए ही जुगाड़ बढ़ाते रहे हैं।
जबकि बिजली बोर्ड में भ्रष्टाचार का बोलबाला है और भ्रष्टाचार में संलिप्त अधिकारियों के खिलाफ कार्यवाही करने के बजाए उन्हें पदोन्नति देने के साथ ही महत्वपूर्ण पदों पर तैनाती दी गई है। जिसकी वजह से बिजली बोर्ड कर्मचारियों का मनोबल लगातार गिरता जा रहा है। इतना ही नहीं बल्कि बिजली बोर्ड में भ्रष्टाचार को लगातार बढ़ावा मिलने की वजह से बिजली बोर्ड लगातार आर्थिक संकट से घिरता जा रहा है।
हिमाचल प्रदेश बिजली बोर्ड में प्रबंध निदेशक का पद वर्ष 2010 में खत्म कर दिया गया है, उसके स्थान पर सीएमडी के पद का प्रावधान किया गया है। इतना ही नहीं बल्कि 2010 से पहले भी प्रबंध निदेशक का पद बिजली बोर्ड में नहीं था।
खरवाड़ा ने बताया कि बिजली बोर्ड के पुनर्गठन के संबंध में वर्ष 2010 में जारी की गई अधिसूचना में प्रबंध निदेशक के पद का कोई प्रावधान नहीं है। इसमें केवल सीएमडी के पद का ही प्रावधान किया गया है। ऐसे में बिजली बोर्ड में प्रबंध निदेशक का पद किसी भी तरह से न्याय संगत नहीं है।
खरवाड़ा ने सरकार के आग्रह किया है कि बिजली बोर्ड में एमडी के पद को पूरी तरह से खत्म करके वरिष्ठ आईएएस अधिकारी को सीएमडी के पद पर तैनात किया जाए। ताकि लगातार बिगड़ती बिजली बोर्ड की आर्थिक स्थिति को नियंत्रित किया जा सके।
उन्होंने यह भी मांग की है कि बिजली बोर्ड के वर्तमान प्रबंध निदेशक को सेवा विस्तार न दिया जाए। क्योंकि उनके कार्यकाल में भी बिजली बोर्ड में भ्रष्टाचार को ही बढ़ावा मिला है उन्होंने कर्मचारी हितों को दरकिनार करते हुए भ्रष्टाचार में लिप्त अधिकारियों को संरक्षण देने का काम किया है। ऐसे में वर्तमान प्रबंध निदेशक को सेवा विस्तार देना बिजली बोर्ड व कर्मचारी हितों पर कुठाराघात होगा।
खेरवाड़ा ने कहा कि 1 जनवरी 2016 के बाद सेवानिवृत्त हुए कर्मचारी आज की संशोधित वेतनमान की दरों के लाभ से वंचित हैं। क्योंकि आर्थिक तौर पर बिजली बोर्ड का दिवालिया निकाला जा चुका है, जिसके लिए बिजली बोर्ड में भ्रष्टाचार में लिप्त अधिकारी ही दोषी हैं।
उन्होंने प्रदेश सरकार से आग्रह किया है कि किसी भी अधिकारी को सेवा विस्तार की स्वीकृति न दी जाए। क्योंकि सेवा विस्तार दिए जाने से बिजली बोर्ड के प्रदेशभर के कर्मचारियों में भारी आक्रोश है।
उन्होंने सरकार से यह भी आग्रह किया है कि बिजली बोर्ड में भ्रष्टाचार के आरोपी अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई अमल में लाते हुए उन्हें महत्वपूर्ण पदों से हटाया जाए। ताकि बिजली बोर्ड की आर्थिक दशा सुधर सके। खरवाड़ा ने बताया कि वह अधिकारियों को सेवा विस्तार न दिए जाने के मसले पर जल्द ही मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू से भी मुलाकात करेंगे।
