कुल्लू टूडे
बिलासपुर/कश्मीर ठाकुर
पूर्व प्रदेश कांग्रेस सचिव व वरिष्ठ कांग्रेस नेता तथा राजीव गांधी पंचायती राज संगठन के प्रदेश सह संयोजक ठाकुर हीरा पाल सिंह ने कहा कि प्रदेश में आज तक जितने भी उद्योग तथा पन बिजली परियोजनाएं स्थापित हुई हैं उनमे अभी तक स्थानीय लोगों के लिए रोजगार की कोई ठोस नीति नही बन पाई है। वह बिलासपुर में पत्रकारों को संबोधित कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश में अब सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व में कांग्रेस की सरकार का गठन हुआ है। जिस तरह से व्यवस्था परिवर्तन के लिए पिछले 45 दिनों से सुखविंदर सिंह सुक्खू ने जनहित में निर्णय लिए हैं उससे अब पूरी आशा जगी है कि आने वाले समय में उद्योगों के साथ साथ पनबिजली परियोजनाओं में भी स्थानीय लोगों तथा हिमाचल के लोगों को अधिमान मिलेगा।
उन्होंने कहा कि इतिहास इस बात का साक्षी है कि आज तक जितनी भी सरकारें रही विस्थापितों के साथ खिलवाड़ करती रहीं है।
लैंडलूजर के नाम पर पुनर्वास को लेकर नेता व अधिकारी कंपनियों से मिलजुल कर लूट पाट करते रहे। सीमेंट उद्योग बरमाना या फिर कोलडैम व भाखड़ा विस्थापितों के नाम पर राजनीति होती रही।
नेताओ, अधिकारियों को परियोजनाओं के प्रबंधन से महंगी गाड़िया व उनके आने जाने के लिए कार्यालय के लिए सजावट का सामान , महंगे उपकरण मिल जाते है। ठेकेदार व बिचौलिए माल खाते रहे, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारी पर्यावरण के सुरक्षा के नाम पर महंगे गिफ्ट लेते रहे।
परंतु स्थानीय विस्थापित की समस्या सुनने के बजाए अधिकारी उनकी बात अनसुनी करते रहे। आज विस्थापन चाहे फोरलेन का हो, उन पात्र लोगों को भी सही मुआवजा नहीं मिला।
कंपनियों के अधिकारी सरकारी तंत्र का शिकार होता रहा। जो धन विस्थापितों के पुनः विस्थापन में लगना था, वह जिला कार्यालय में सब डिवीजन कार्यालय की चकाचौंध चमकाने में लग रहा है।
विस्थापित दर दर की ठोकरें खाने के लिए मजबूर हैं। कोल डैम परियोजना के लाभांश से विस्थापितों को एक प्रतिशत राशि का भुगतान आज तक नहीं हो पाया है।
क्योंकि अभी तक सोलन, शिमला, मंडी तथा बिलासपुर जिलों के उपायुक्त कार्यालय विस्थापितों की सूची नहीं बना पाए हैं। लैंड लूजर के बसाव, उनकी शिक्षा , चिकित्सा पर सिर्फ आंकड़ों का मक्क्ड़जाल बनता रहा।
जब तक ऐसे मुद्दों के हल के लिए राजनेता, अधिकारी अमलीजामा नही पहनाएंगे, तब तक मुख्यमंत्री की व्यवस्था परिवर्तन योजना सिरे नहीं चढ़ सकती है।
जब तक अधिकारी, नेता और मीडिया इन मुद्दों पर सकारात्मक नहीं सोचेंगे और अपने निजी हितों को पीछे नहीं छोड़ेंगे, तब तक व्यवस्था परिवर्तन की बात करना व्यर्थ है। पत्रकार वार्ता में पूर्व प्रधान जोगेंद्र सिंह ठाकुर तथा एनएस यूआई के सचिव रितिक भी उपस्थित रहे।
