कुल्लू टूडे
शिमला
भारतीय चित्र साधना और हिम सिने सोसाइटी सिनेमा के माध्यम से राष्ट्रभाव की भावना युवाओं में पैदा करने के लिए कार्य कर रही है ताकि संस्कार युक्त विचार समाज में प्रवाहित हो सके।
यह विचार शहरी विकास, आवास, नगर नियोजन, संसदीय कार्य, विधि एवं सहकारिता मंत्री सुरेश भारद्वाज ने आज हिम सिने सोसायटी एवं भारतीय चित्र साधना द्वारा गेयटी थियेटर में आयोजित 2 दिवसीय (25-26 सितंबर) हिमचित्रोत्सव-2022 कार्यक्रम के शुभारंभ अवसर पर अपने संबोधन में कही।
उन्होंने कहा कि भारतीय चित्र साधना और हिम सीने सोसाइटी का यह सराहनीय प्रयास है। विगत वर्षों में फिल्म फेस्टिवल के माध्यम से प्रदेश के कलाकारों और फिल्म निर्देशकों को मंच प्रदान किया जा रहा है जो अत्यंत सराहनीय हैं भविष्य में भी हिम सिने सोसाइटी अपने प्रयासों को गति प्रदान करेंगी।
शिमला शहर लगभग 150 से 200 वर्ष पुराना शहर है। अंग्रेजों के कार्यकाल के दौरान भी गेयटी थिएटर में कला साधना का प्रमुख स्थान था। दुनिया का दूसरा गौथिक थिएटर भी गेयटी थिएटर में मौजूद है।
आजादी के उपरांत अटल बिहारी वाजपेई के कार्यकाल के दौरान गेयटी थियेटर का जीर्णोद्धार किया गया, जिसके उपरांत थिएटर में अनेकों कलाकारों ने अपनी कला का प्रदर्शन कर देश तथा विदेश में अपनी पहचान बनाई। आज भी शिमला तथा आस पास के क्षेत्र फिल्म बनाने के लिए आदर्श माने जाते है।
उन्होंने कहा कि आज के समय में अनेकों प्रकार की फिल्मों, शॉर्ट फिल्म, डॉक्यूमेंट्री तथा सीरियल का निर्माण किया जा रहा है जिस से सिनेमा जगत आगे बढ़ रहा है।
उन्होंने कहा की आज प्रदेश हर क्षेत्र में अपनी अहम भूमिका अदा कर रहा है। हमें आज के दौर में स्थानीय स्तर पर उचित मार्गदर्शन मिलना जरूरी है ताकि स्थानीय स्तर के कलाकारों को आगे बढ़ने का मौका मिले। उन्होंने कहा की राष्ट्रीय एकीकरण में फिल्म का महत्वपूर्ण योगदान रहा है।
वहीं विविध कलाओं तथा मातृभाषा के लिए राष्ट्रीय शिक्षा नीति में स्थान प्रदान किया गया है। हिम सिने सोसाइटी का इस क्षेत्र को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान रहा है।
उन्होंने सोसायटी को अपने ऐच्छिक निधि से 15 हजार रुपए देने की घोषणा की।
शहरी विकास मंत्री ने हिम चित्रोत्सव पर आधारित स्मारिका का विमोचन किया।
