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कुल्लू टुडे

कुल्लू

देव संस्कृति चैरिटेबल ट्रस्ट कुल्लू द्वारा जिला कारदार संघ की वर्तमान स्थिति, फर्जी सदस्यता और समय पर चुनाव न करवाने को लेकर बीते दिन एक प्रेस वार्ता का आयोजन किया गया।

इस दौरान ट्रस्ट के प्रबंध न्यासी (मैनेजिंग ट्रस्टी) ओम प्रकाश शर्मा और पूर्व अध्यक्ष जिला देवी-देवता कारदार संघ जय चंद ठाकुर, पूर्व भाषा एवं संस्कृति विभाग के अधिकारी सीताराम ठाकुर विशेष रूप से मौजूद रहे।

पत्रकारों को संबोधित करते हुए ओम प्रकाश शर्मा ने बताया कि जिला कारदार संघ, कुल्लू में नियम-कायदों को दरकिनार कर कार्य किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि संघ में केवल उन्हीं लोगों को सदस्य के रूप में मान्यता मिलनी चाहिए, जो विधिवत रूप से ‘वाजिब-उल-अर्ज’ (Wajib-ul-Arz) एवं सक्षम प्राधिकारी द्वारा आधिकारिक तौर पर नियुक्त कारदार हैं। बिना वैध नियुक्ति पत्र और रिकॉर्ड के संघ में शामिल किए गए असंवैधानिक सदस्यों की जांच कर उनकी सदस्यता रद्द की जानी चाहिए।

प्रेस वार्ता में ओम प्रकाश शर्मा ने हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय के विभिन्न फैसलों (जैसे CWP No. 4824/2009, CWP No. 8203/2011 और CWP 1978/2016) का हवाला देते हुए स्पष्ट किया कि कुल्लू घाटी में कारदार की नियुक्ति ‘वाजिब-उल-अर्ज’ और जिला कलेक्टर/उपायुक्त के माध्यम से नियमानुसार होती है।

इसलिए जिला प्रशासन को कारदार संघ की पूरी सदस्यता सूची की निष्पक्ष जांच और सत्यापन (Verification) करना चाहिए।

कार्यकाल समाप्त होने के बाद भी पद पर बने रहने का आरोप
पूर्व अध्यक्ष जय चंद ठाकुर ने बताया कि जिला देवी-देवता कारदार संघ के पिछले चुनाव 30 नवंबर 2021 को हुए थे, जिसका 3 वर्ष का कार्यकाल 30 नवंबर 2024 को समाप्त हो चुका है।

सोसायटी रजिस्ट्रेशन एक्ट के तहत कार्यकाल पूरा होने पर तुरंत नए चुनाव करवाए जाने चाहिए थे, लेकिन अब तक चुनाव नहीं कराए गए हैं।

उन्होंने आरोप लगाया कि 30 नवंबर 2024 के बाद वर्तमान कार्यकारिणी को पद पर बने रहने, कार्य करने या कोई भी महत्वपूर्ण नीतिगत फैसला लेने का कानूनी व नैतिक अधिकार नहीं है।

ट्रस्ट और पूर्व पदाधिकारियों ने उपायुक्त-सह-कलेक्टर कुल्लू को ज्ञापन सौंपकर मांग की है कि
जिला कारदार संघ की वर्तमान सदस्यता सूची मंगाकर उसका प्रामाणिक सत्यापन किया जाए।

केवल वैध ‘वाजिब-उल-अर्ज’ एवं नियुक्ति पत्र वाले असली कारदारों का जिला-स्तरीय रजिस्टर तैयार हो।

जब तक सत्यापन की प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाती, तब तक वर्तमान अवैध कार्यकारिणी से कार्यभार वापस लिया जाए और केवल सत्यापित कारदारों के माध्यम से ही प्रशासनिक प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया जाए।

उन्होंने कहा कि देव संस्कृति, देव संपत्ति और देव कोष की सुरक्षा एवं पारदर्शिता बनाए रखने के लिए यह कदम उठाना बेहद अनिवार्य है।

इस दौरान उन्होंने वर्तमान विधायक सुंदर सिंह ठाकुर एवं पूर्व सांसद रहे महेश्वर सिंह पर भी निशाना साधा। और बहुत से गंभीर आरोप लगाए।

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