कुल्लू टुडे
बिलासपुर, कश्मीर ठाकुर
राष्ट्र सेविका समिति की अखिल भारतीय कार्यकारिणी एवं प्रतिनिधि सभा की बैठक समालखा में आयोजित हुई।
बैठक में देश में बदलते जनसंख्या अनुपात को गंभीर विषय बताते हुए केंद्र और सभी राज्य सरकारों से पूरे देश में सभी समुदायों के लिए समान राष्ट्रीय जनसंख्या नीति लागू करने की मांग उठाई गई। इसके साथ ही देशभर में समान नागरिक संहिता लागू करने पर भी जोर दिया गया।
बैठक में भाग लेकर लौटी राष्ट्र सेविका समिति की हिमाचल प्रांत कार्यवाहिका मुक्ता ने बताया कि समिति का मानना है कि जनसंख्या के बदलते स्वरूप का प्रभाव देश की सामाजिक व्यवस्था, एकता और अखंडता पर पड़ सकता है।
उन्होंने कहा कि भारत की पहचान सर्वपंथ समादर और ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ जैसी परंपराओं से बनी है और इसे मजबूत बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है।
उन्होंने प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद से संबंधित आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि वर्ष 1951 में देश की कुल आबादी में हिंदुओं की हिस्सेदारी 84.68 प्रतिशत थी, जो वर्ष 2015 में घटकर 78.06 प्रतिशत रह गई। वहीं इसी अवधि में मुस्लिम आबादी का अनुपात 9.84 प्रतिशत से बढ़कर 14.09 प्रतिशत हुआ।
उन्होंने कहा कि इन आंकड़ों को ध्यान में रखते हुए देश की जनसंख्या नीति पर व्यापक स्तर पर विचार किया जाना आवश्यक है।
मुक्ता ने कहा कि सीमावर्ती क्षेत्रों में अवैध घुसपैठ भी जनसंख्या के स्वरूप में बदलाव का एक महत्वपूर्ण कारण है।
उन्होंने आरोप लगाया कि रोहिंग्या और बांग्लादेशी नागरिकों की अवैध मौजूदगी का असर स्थानीय स्तर पर रोजगार, भूमि और प्राकृतिक संसाधनों पर पड़ रहा है।
उन्होंने मतांतरण और तथाकथित ‘लव जिहाद’ को लेकर भी कड़े कानूनी प्रावधान किए जाने की मांग रखी।
उन्होंने कहा कि भारत वर्तमान में युवा आबादी वाला देश है, लेकिन आने वाले दशकों में जनसंख्या की आयु संरचना में बड़ा बदलाव होगा।
ऐसे में परिवारों में बच्चों की संख्या लगातार कम होने का असर भविष्य में सामाजिक और आर्थिक व्यवस्था पर पड़ सकता है।
उन्होंने युवाओं से परिवार और समाज के भविष्य को ध्यान में रखते हुए इस विषय पर गंभीरता से विचार करने का आह्वान किया।
राष्ट्र सेविका समिति ने केंद्र एवं राज्य सरकारों से मांग की कि अवैध घुसपैठ पर प्रभावी रोक लगाने के लिए सीमाओं पर आवश्यक व्यवस्थाएं मजबूत की जाएं।
साथ ही देश में अवैध रूप से रह रहे विदेशी नागरिकों की पहचान कर नियमानुसार उन्हें वापस भेजने की प्रक्रिया अपनाई जाए। समिति ने मतांतरण से संबंधित गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण के लिए सख्त कानून बनाने की भी मांग की।
