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कुल्लू टूडे

कुल्लू

जिला मुख्यालय कुल्लू स्थित मठ क्षेत्र के अधिकांश हिस्सों में पर्याप्त जल निकासी सुविधाओं का अभाव है। उचित व्यवस्था न होने के कारण कई घर वर्षा का पानी सीधे सीवरेज चैम्बरों में डाल रहे हैं।

इस कारण बरसात के दौरान बार-बार ओवरफ्लो होता है और पानी पहाड़ी में रिसकर इनर अखाड़ा बाज़ार के ऊपर की ढलानों को अस्थिर कर देता है। अधिकारियों और स्थानीय निवासियों का मानना है कि लगातार हो रही यह रिसावट बार-बार होने वाले भूस्खलनों का मुख्य कारण है।

हाल ही में तीन महीने पहले हुए दोहरे भूस्खलन में दस लोगों की जान गई थी और दस से अधिक मकान नष्ट हो गए थे। तब से लगभग दो सौ मकानों में रह रहे करीब एक हजार निवासी लगातार भय में जी रहे हैं।

खासकर जब सर्दियों की बारिश नज़दीक है। बार-बार की गई SOS अपीलों के जवाब में आज जल शक्ति विभाग, नगर परिषद और स्थानीय निवासियों ने संयुक्त सर्वेक्षण किया।

त्रासदी की गंभीरता के बावजूद स्थानीय लोगों ने नाराज़गी जताई कि पिछले तीन महीनों में समस्या की जड़ को दूर करने के लिए बहुत कम प्रयास किए गए।

कुल्लू जल शक्ति विभाग के एसडीओ अंकित बिष्ट ने बताया कि विभाग ने उन लोगों की सूची तैयार की है जो छत का वर्षा जल सीवरेज चैम्बरों में डाल रहे हैं।

उन्होंने चेतावनी दी कि उल्लंघन करने वालों को नोटिस जारी किए जाएंगे और अनुपालन न करने पर उनके पानी और बिजली के कनेक्शन काट दिए जाएंगे।

नगर परिषद के जेई सचिन ने बताया कि पहले ही एक उचित जल निकासी योजना बनाई गई थी और इसके लिए धन भी आवंटित किया गया था। लेकिन कुछ निवासियों ने प्रस्तावित नाले की दिशा पर आपत्ति जताई, जिससे परियोजना अटक गई।

स्थानीय निवासी राजीव, संजीव और लक्की ने सख्त प्रशासनिक आदेश और पर्याप्त पुलिस सुरक्षा की मांग की ताकि कर्मचारी सुरक्षित रूप से जल निकासी परियोजना को पूरा कर सकें।

उन्होंने जोर दिया कि दोषपूर्ण जल निकासी ही रिसाव और बार-बार होने वाले भूस्खलनों का मुख्य कारण है।

एक अन्य निवासी, राजन ने मठ क्षेत्र में अनियंत्रित निर्माण की ओर ध्यान दिलाया। उन्होंने बताया कि पिछले दशक में मकानों की संख्या लगभग दस गुना बढ़ गई है, जो भू-भाग की क्षमता से कहीं अधिक है। उन्होंने क्षेत्र को ग्रीन ज़ोन घोषित करने और नए निर्माण पर तत्काल रोक लगाने की मांग की।

स्थानीय निवासियों ने यह भी सवाल उठाया कि उचित जल निकासी व्यवस्था न होने के बावजूद भवन निर्माण की स्वीकृति कैसे दी गई।

वहीं नगर परिषद अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि TCP विभाग ने आर्किटेक्ट्स को भवन योजनाओं को मंज़ूरी देने का अधिकार दिया था, जिन्हें बाद में नगर परिषद को सौंपा गया, जिससे कई तकनीकी रूप से त्रुटिपूर्ण संरचनाएँ बनीं।

स्थानीय विवेक सूद ने मरम्मत प्रक्रिया में जवाबदेही और पारदर्शिता सुनिश्चित करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि सीवरेज और जल निकासी की मरम्मत के लिए जारी निविदाओं में न्यूनतम मानकों का स्पष्ट उल्लेख होना चाहिए और इन्हें सार्वजनिक किया जाना चाहिए, ताकि निवासी जान सकें कि किन मानकों का पालन अपेक्षित है।

उन्होंने आगे कहा कि ठेकेदारों को काम पूरा होने के बाद भी किसी भी दोष या विफलता के लिए जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए। उन्होंने मांग की कि निवासियों की एक समिति को निर्माण कार्य की निगरानी का अधिकार दिया जाए ताकि घटिया काम रोका जा सके और गुणवत्ता सुनिश्चित की जा सके।

सर्वेक्षण और जल शक्ति व नगर परिषद अधिकारियों की आश्वासन के बाद निवासियों ने सावधानीपूर्वक आशा जताई, लेकिन साथ ही तत्काल भूस्खलन मलबे को हटाने और क्षतिग्रस्त मकानों की बहाली की मांग दोहराई ताकि परिवार सुरक्षित जीवन स्थितियों में लौट सकें।

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