Spread the love

कुल्लू टूडे

बिलासपुर, कश्मीर ठाकुर

बिलासपुर जिला में मंगलवार को हरतालिका तीज व्रत धूमधाम से मनाया गया।

स्थानीय बोली में ‘चिड़ियों का व्रत कहे जाने वाले इस उपवास के उपलक्ष्य में जहां शिवालयों में महिलाओं की खूब भीड़ उमड़ी, वहीं चुनिंदा घरों में मिट्टी से बनाई गई चिड़ियों (शिव, पार्वती व गणेश आदि की मूर्तियां) की भी विधिवत रूप से पूजा-अर्चना की गई।

करवाचौथ की तर्ज पर अपने जीवनसाथी की दीर्घायु के लिए हरतालिका तीज उपवास रखने वाली महिलाएं अब बुधवार सुबह अन्न-जल ग्रहण करेंगी।

अखंड सौभाग्य का प्रतीक माना जाने वाला हरतालिका तीज व्रत बिलासपुर जिला में विशेष तौर पर मनाया जाता है। किदवंती के अनुसार देवी पार्वती भगवान शिव से विवाह करना चाहती थीं।

जब उन्हें पता चला कि उनके पिता उनका विवाह भगवान विष्णु के साथ करना चाहते हैं, तो वह अपनी एक सहेली के साथ हिमालय के जंगलों में चली गईं। भगवान भोलेनाथ को अपने जीवनसाथी के रूप में हासिल करने के लिए उन्होंने अन्न-जल त्याग कर जंगल में कठोर तपस्या की। उनकी यह तपस्या सफल हुई और भगवान शिव उन्हें जीवनसाथी के रूप में मिल गए।

इसी उपलक्ष्य में भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया को हरतालिका तीज व्रत मनाया जाता है। महिलाएं जहां अपने सुहाग की सलामती के लिए यह व्रत रखती हैं, वहीं कई लड़कियां मनचाहे वर की कामना से उपवास करती हैं।

बिलासपुर में हरतालिका तीज व्रत को ‘चिड़ियों का व्रत’ के नाम से जाना जाता है। इसके उपलक्ष्य में चुनिंदा घरों में चिकनी मिट्टी से चिड़ियां (शिव, पार्वती व गणेश आदि की मूर्तियां) बनाई जाती हैं। उन्हें विभिन्न रंगों से सजाया जाता है।

शहर के कोसरियां सेक्टर में पूर्व पार्षद कृष्णलाल उपाध्याय की धर्मपत्नी शीला देवी बीते कई दशकों से यह परंपरा निभा रही हैं।

मंगलवार को इस व्रत के उपलक्ष्य में बड़ी संख्या में महिलाओं ने उनके घर जाकर चिड़ियों की पूजा-अर्चना की।

साथ ही शिवालयों में भी सुहाग की दीर्घायु के लिए कामना की। इस व्रत को करवाचैथ से भी कहीं अधिक कठिन माना जाता है।

करवाचौथ पर महिलाएं जहां रात को चंद्रमा की पूजा-अर्चना करके भोजन ग्रहण कर लेती हैं, वहीं हरतालिका तीज का उपवास अगले दिन ही तोड़ा जाता है।

लिहाजा महिलाएं अब बुधवार सुबह विधिवत रूप से पूजा-अर्चना करने के बाद ही अन्न-जल ग्रहण करेंगी।

Leave a Reply

error: Content is protected !!