कुल्लू टूडे
बिलासपुर, कश्मीर ठाकुर
हिमाचल प्रदेश के प्रमुख जलाशयों में दो माह के प्रतिबंध हटने के बाद शनिवार को मछली पकड़ने का सीजन शुरू होते ही उत्साहजनक परिणाम सामने आए हैं।
पिछले वर्ष 2024 की तुलना में इस वर्ष पहले ही दिन 1.21 मीट्रिक टन अधिक मछली पकड़ी गई।
वर्ष 2024 में जहां कुल 31.85 मीट्रिक टन मछली निकली थी, वहीं 2025 में यह आंकड़ा बढ़कर 33.06 मीट्रिक टन पर पहुंच गया।
विभाग के अनुसार, पिछले वर्ष प्रदेश के जलाशयों में 70 एमएम आकार से अधिक का मत्स्य बीज संग्रहित किया गया था, जिसका सीधा असर इस वर्ष के उत्पादन पर देखने को मिला।
आंकड़ों के मुताबिक, गोबिंद सागर जलाशय से 12924.00 किलोग्राम, कोलडैम से 9,300 किलोग्राम, पौंग जलाशय से 18500.00 किलोग्राम और चमेरा व रणजीत सागर से 15,435.00 किलोग्राम मछली पकड़ी गई।
प्रजाति के अनुसार गोबिंदसागर, कोलडैम और चंबा में सिल्वर कार्प तथा पांग डैम में सिंघारा मछली प्रमुख रही।सीजन के पहले ही दिन प्रदेश में कई बड़ी मछलियां भी पकड़ी गईं।
पौंग डैम के खटियार लैंडिंग सेंटर के श्रवण कुमार (खटियार सहकारी सभा) ने 26.3 किलोग्राम की सबसे बड़ी कतला पकड़ी।
वहीं गोबिंदसागर में जबलु मत्स्य सहकारी सभा के सरवन कुमार ने 25.00 किलोग्राम की बिग हेड मछली पकड़ी।
चंबा में संधारा मत्स्य सहकारी सभा के ओमप्रकाश ने 25.00 किलोग्राम की सिल्वर कार्प और कोलडैम में बेरल मत्स्य सहकारी सभा के नरपत राम ने 5.0 किलोग्राम की सिल्वर कार्प पकड़ी।
हिमाचल प्रदेश के प्रमुख जलाश्यों में शनिवार को दो माह के वर्जितकाल के बाद पहले दिन गत वर्ष 2024 की तुलना में इस वर्ष 1.21 मिट्रिक टन की वृद्धि दर्ज हुई है ।
गत वर्ष 2024 मेें में प्रदेश के जलाशयों से कुल 3185 मिट्रिक टन मछली पकड़ी गई थी।
जिसकी तुलना में वर्ष 2025 में कुल 33.06 मिट्रिक टन मछली पकड़ी गई है।
लैंडिंग सेंटरवार आंकड़ों में पौंग डैम के नगरोटा सुरियाँ से 3.45 मीट्रिक टन, गोबिंदसागर के जड्डू से 3.75 मीट्रिक टन और चंबा के संधारा से 1.60 मीट्रिक टन मछली उतारी गई।
गौरतलब है कि प्रदेश में 12 हजार से अधिक मछुआरे जलाशयों, नदियों व सहायक नालों में मत्स्य पालन कर अपनी जीविका चला रहे हैं।
