कुल्लू टूडे
बिलासपुर, कश्मीर ठाकुर
रविवार को घुमारवीं के रैन बसेरा परिसर में संस्कार सोसायटी द्वारा घुमारवीं अगेंस्ट चिट्टा विषय पर कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया।
इस अवसर पर कवि एवं साहित्यकार कुलदीप चंदेल ने मुख्यातिथि के रूप में शिरकत की।
उन्होंने कहा कि संस्कार संस्था जैसी समाज सेवी संस्थाओं की समाज को बहुत जरूरत है।
हिदुस्तान के युवा को नशे से खोखला करने के पीछे विदेशी ताकतों का हाथ हो सकता है। अपने बच्चों के साथ मित्र की तरह रहे और बच्चों से दूरी बिल्कुल भी न बनाये।
कार्यक्रम अध्यक्ष रविन्द्र शर्मा लेखक महासंसघ महासचिव ने कहा कि संस्था नशे के प्रति समाज मे जागरूकता कर नेक कार्य कर रही है।
पुलिस चाहे तो चिट्टा बिकना बन्द हो जाए, अगर ईमादारी से काम करे। सहानुभूति से बच्चों से नशे को छुड़ाए।
कवि सम्मेलन में जिला के प्रख्यात कवियों व युवा कवियों ने भाग लिया। कवि सम्मेलन में कविताओं के माध्यम से लोगों को जागरूक किया।
नाम ही है चिट्टा काम है काले, माता पिता क्या करे जब हर जगह पहुच रहा चिट्टा, ढाई इंच की सिरिंज से युवा के खून को पानी बना रहा है चिट्टा।
नशे से दुखने लगी हड्डियां, मत फसा इस चिट्टा रे नशा नहीं तो हो जाना बर्बाद, चिट्टे नू न लगायो हथ मेरे युवा साथियों, उड़ता पंजाब कब बन गया शांत हिमाचल मेरा, चिट्टा चिट्टा गली मोहल्ले च बिकदा तस्कर बेची बेची नी रजदा, फिटे मुह चिटुआ, नशा मुक्त अभियान चलाकर चिट्टा नामक राक्षश को भगाना है।
शर्म करो चिट्टे रे बपारियो पुड़िया च मत बेचो मौत, मौत रे बपारिया जो चक्के भगवान, चिट्टे के खिलाफ है।
समाज में अलख जगाना है, बच्चा अपना हो या पराया सब को बचाना है, चिट्टा है मीठा जहर, चिट्टे रे नशे ज्यूंदे ही मारे, किने बगाड़े म्हारे गबरू आदि कवितायें सुनाकर चिट्टे के प्रति जागरूक किया।
वहीं संस्थापक महेंद्र धर्माणी ने कहा कि चिट्टे से आज हमारे बच्चे ऐसे मर रहे है जैसे पेड़ों से पत्ते झड़ रहे हों, इसे रोकने के लिए नशे माफिया पर लगाना और चिट्टा के नशे में फंस चुके बच्चो को काउंसलिंग की मदद से बाहर निकालने का काम करना होगा, तभी हमारी युवा पीढ़ी का भविष्य सुरक्षित होगा।
उन्होंने कहा कि बच्चों की हालत दिन प्रतिदिन खराब होती जा रही है, अब भाषण से काम नही चलेगा। बच्चों को चाहे शौक में या दोस्तों ने चिट्टा पिलाया हो उसके बारे में हमे धारणा बदलनी पड़ेगी।
हमे उसकी काउंसलिंग करनी होगी और बच्चों को ऐसा माहौल देना होगा कि वह अपने दिनचर्या की हर बात अपने माता पिता से सांझा करें। छोटे बच्चों को नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करने की जरूरत है।
उन्होंने गांव के बुद्धिजीवियों, बड़े बजुर्गो से आग्रह किया कि हम अपने गांव व आस पड़ोस में किसी भी अनजान या संदिग्ध व्यक्ति को नही आने दें। अगर कोई आए तो उसकी सूचना तुरंत पुलिस को दें।
चिट्टा सप्लायर और पुलिस पर अगर सामाजिक दबाव बढ़ेगा तभी पुलिस और प्रशासन हरकत में आएगा। उन्होंने कहा कि पुलिस को सख्ती से काम करने की जरूरत है।
इस सम्मेलन में जीवन, सुनील शर्मा, अजय शर्मा, कनिका, नैंसी ठाकुर, रवींद्र सारथी, बीरबल धीमान, रेखा चंदेल, बाबू राम धीमान, डॉ. अनेक संख्यान, देवेंद्र ठाकुर, प्रीति, मधु, बृज लाल, विनोद वर्मा, केशव शर्मा, रचना चंदेल, परमजीत, राज कुमार, एनआर हितैषी, धर्म चंद धीमान, जीतराम सुमन, सुषमा खजुरिया, संदेश आदि कवि उपस्थित रहे।
