कुल्लू टूडे
बिलासपुर, कश्मीर ठाकुर
नगर के श्री लक्ष्मी नारायण मंदिर में मंदिर न्यास के तत्वावधान में चल रही श्रीशिव महापुराण कथा के पांचवें दिन कथा वाचक पंडित सुशील कुमार ने तारकासुर की कथा सुनाई।
उन्होंने बताया कि असुर तारकासुर ने भगवान शिव की घोर तपस्या की जिससे प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उसे वरदान दिया कि ब्रम्हाड में कोई भी उसे मार नहीं सकेगा। उसका वध केवल महादेव के पुत्र के हाथों की हो सकेगा।
यह विशेष वरदान हासिल कर तारकासुर तीनों लोकों पर अत्याचार करने लगा। उससे सभी देव और मनुष्य भयभीत हो गए। असुर तारकासुर को भगवान शिव से वरदान प्राप्त था कि उसे शिव पुत्र के अलावा कोई दूसरा नहीं मार सकता था।
माता सती के आत्मदाह के बाद से शिव जी वैरागी होकर समाधि में लीन थे, सभी देवतागण तारकासुर के अत्याचार से पीड़ित हो गए थे वे ब्रह्मा जी के पास मदद के लिए गए, लेकिन उनसे कोई मदद नहीं मिली।
उन्होंने इतना ही बताया कि तारकासुर का वध केवल शिव पुत्र के हाथों ही हो सकता है।
अब समस्या यह थी कि वैरागी भगवान शिव को गृहस्थ कैसे बनाया जाए ताकि उनका माता पार्वती से विवाह हो और शिव पुत्र जन्म ले। कामदेव ने प्रयास किया तो वे शिव जी के क्रोध का कोपभाजन बने।
उधर माता पार्वती भगवान शिव को पति स्वरुप में पाने के लिए कठोर तप कर रही थीं, अंतत भगवान शिव उनसे प्रसन्न हुए और दोनों का विवाह हुआ।
पंडित सुशील कुमार ने बताया कि दोनों के योग से कुमार कार्तिकेय का जन्म हुआ।
कहा जाता है कि कार्तिकेय का जन्म षष्ठी तिथि को हुआ था और उनका एक नाम स्कंद भी है, इस वजह से हर मास की षष्ठी तिथि को स्कंद षष्ठी का व्रत रखा जाता है। जो भगवान कार्तिकेय को समर्पित है।
शुभ समय आने पर भगवान कार्तिकेय ने देवासुर संग्राम में असुर तारकासुर का वध कर दिया और तीनों लोकों में पुनः सत्य एवं धर्म की स्थापना हुई।
मंदिर न्यास के पंडित बाबू राम शर्मा ने बताया कि 9 मार्च को तीन बजे से अटूट भंडारे का आयोजन भी किया जाएगा।
