कुल्लू टूडे
बिलासपुर/कश्मीर ठाकुर
राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला बरमाना का पुराना जर्जर भवन अब नशेड़ियों का अड्डा बनता जा रहा है। इस मामले को बरमाणा पंचायत के उप प्रधान अवधेश भारद्वाज ने प्रमुखता से उठाया है।
उन्होंने कहा कि रावमापा बरमाना के पुराने भवन का निर्माण एसीसी प्रबंधन ने लगभग 25 वर्ष पूर्व किया था। जैसे जैसे छात्रों की संख्या बढ़ती गई।
ग्रामीणों के आवाहन पर स्कूल को सरकार ने अपग्रेड किया तथा सरकार के आदेश पर एसीसी प्रबंधन ने लगभग 18 वर्ष पूर्व एनएच 21 के साथ एक और स्कूल के भवन का निर्माण किया। छात्रों को शिक्षा नए स्कूल में मिलने लगी।
उप प्रधान ने आरोप लगाते हुए कहा कि इस स्कूल को व्यवस्थित रूप से नहीं बनाया है और अभी तक वह इनकंप्लीट हैं तथा भवन की छतों से रिसाव होता है और पीलर भी जर्जर हो चुके हैं जो एसीसी सीमेंट की परिपक्वता पर सवाल उठाते हैं।
गौरतलब है कि इस भवन को खाली हुए लगभग 18 साल हो गए पर शिक्षा विभाग ने इस भवन की देखरेख तो क्या करनी आज तक स्थिति का भी जायजा नहीं लिया।
उप प्रधान ने बताया लगभग डेढ़ वर्ष पूर्व भी उन्होंने डिप्टी डायरेक्टर बिलासपुर शिक्षा विभाग को ज्ञापन दिया था कि इस भवन की रिपेयर के लिए बजट का प्रावधान किया जाए।
बरमाना स्कूल का यह पुराण भवन किसी न किसी स्थायी गतिविधि के लिए उपयोग हो सके।
इस भवन के खिड़की दरवाजे अधिकांश खराब हो चुके हैं तथा बिजली की व्यवस्था न होने के कारण रात को यह भवन नशेड़ियों को नशे का केंद्र बिंदु बन चुका है।
उन्होंने स्कूल के प्रधानाचार्य से पीडब्ल्यूडी विभाग द्वारा भवन रिपेयर के लिए एस्टीमेट बनाने का प्रस्ताव रखा था।
परिणाम स्वरूप आज कनिष्ठ अभियंता पीडब्ल्यूडी विभाग बेरी खंड ने मौके पर आकर पूरे भवन का माप लिया।
अब बरमाना पंचायत बजट प्रावधान के लिए उपायुक्त बिलासपुर आबिद हुसैन सादिक को ज्ञापन देगी।
उन्होंने बताया कि लगभग 6 महीने पहले राज्य सरकार ने भी जिला प्रशासन को आदेश करके जिले में कितनी ऐसी जर्जर सरकारी इमारतें हैं उनकी रिपोर्ट मांगी थी।
लेकिन अभी तक कोई भी प्रतिक्रिया ज़िला प्रशासन की तरफ से नहीं हुई है।
आज हर क्षेत्र में और विशेष कर शिक्षा के क्षेत्र में स्कूल द्वारा कमरों की सरकार से मांग रहती है।
अगर एक नजर ऐसी इमारतों पर डाली जाए तो असंख्य इमारतें ऐसी होगी जिनके बारे में न प्रशासन और न ही विभाग एक्शन मूड में है।
