कुल्लू टूडे
बिलासपुर/कश्मीर ठाकुर
बिलासपुर सदर के विधायक त्रिलोक जमवाल ने आपदा के दौरान ठप हुई मूलभूत सुविधाओं की बहाली में देरी को लेकर प्रदेश सरकार पर तंज कसा है।
उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार ने लंबे इंतजार के बाद आपदा पीड़ितों को राहत देने की प्रक्रिया शुरू तो की है, लेकिन ग्रामीण इलाकों की कई सड़कें अभी भी बहाल नहीं हो पाई हैं।
यही हाल पेयजल योजनाओं का है। कई पंचायतों में लोगों को पीने का पानी सप्ताह में मुश्किल से एक या दो बार नसीब हो रहा है।
इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि आपदा पीड़ितों और प्रभावितों के जख्मों पर मरहम लगाने में यह सरकार कितनी गंभीर है।
रविवार को मल्यावर तथा आसपास की कई अन्य पंचायतों के दौरे के दौरान त्रिलोक जमवाल ने लोगों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनीं।
उन्होंने कहा कि सड़कें किसी भी क्षेत्र की भाग्य रेखाएं होती हैं, लेकिन बरसात के मौसम में भूस्खलन अथवा जमीन धंसने से बंद हुई ग्रामीण इलाकों की कई संपर्क सड़कें अभी भी बहाल नहीं हो पाई हैं।
कई सड़कें अभी भी बसें चलने लायक नहीं हैं। इससे बंद हुई सड़कों को 72 घंटे के भीतर बहाल करने के सरकारी दावों की पोल खुल रही है।
72 घंटे तो दूर, बरसात का मौसम खत्म होने के 72 दिनों बाद भी स्थिति जस की तस है। सड़कें बंद होने की वजह से लोगों को अत्याधिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
त्रिलोक जमवाल ने कहा कि कई पेयजल योजनाओं की भी यही हालत है। बरसात में कहीं स्टोरेज टैंक या पंप हाउस क्षतिग्रस्त हुए थे, जबकि कहीं पाइप लाइनों को नुकसान पहुंचा था।
सरकारी कागजों में भले ही सब-कुछ ठीक किया जा चुका हो, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि मल्यावर, ननावां, मंदरीघाट, जबल्याणा व कुहमझवाड़ समेत कई इलाकों में लोगों को सप्ताह में मुश्किल से एक या दो बार पानी मिल रहा है।
कोलबांध उठाऊ पेयजल योजना लाखों लोगों की प्यास बुझा रही है, लेकिन इस जलाशय के आसपास के हरनोड़ा, चम्यौण, बौहट और कसोल जैसे क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को भी पानी के लिए तरसना पड़ रहा है।
कई बार फिल्टर किए बगैर ही पानी की आपूर्ति कर दी जाती है। पानी दूषित होने की स्थिति में कई जलजनित बीमारियां भी फैल सकती हैं।
बेहतर होगा कि अपनी राजनीतिक रोटियां संेकने के लिए केंद्र सरकार पर झूठे और मनगढ़ंत आरोप लगाने में समय बर्बाद करने के बजाए प्रदेश सरकार लोगों की मूलभूत सुविधाओं की बहाली के लिए धरातल पर काम करें।
