कुल्लू टूडे
बिलासपुर, कश्मीर ठाकुर
मौजूद परिस्थितियां दिन प्रतिदिन विपरीत होती जा रही हैं, पल का भरोसा तक नहीं है।
फिर भी इस जीवन को जीने के लिए संघर्ष करना ही पड़ता है, ऐसे में जो लोग उम्र के इस पड़ाव में दुखी हैं, यदि उनको कुछ क्षणों की खुशी मिल जाए तो सबसे बड़ा पुण्य यही है।
यह बात राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला में राजनीति शास्त्र में प्रवक्ता पद पर सेवाएं दे रही पूनम ने अपना जन्मदिन वृद्धाश्रम के सदस्यों से मनाते हुए कही।
पूनम ने बताया कि हमारे समाज में यह चिंतन करने का विषय है कि आज वृद्धाश्रमों की क्या जरूरत आन पड़ी है।
पाषाण हो चुकी मानवता ऐसे दृश्य दिखाकर समाज को आईना तो दिखाती
है लेकिन ऐसे मामले निरंतर उजागर हो रहे हैं।
पूनम ने बताया कि अपने
परिवार के साथ अक्सर जन्मदिन या अन्य खुशियों को सांझा किया जाता है।
लेकिन वृद्धाश्रम के सदस्यों के साथ इस खुशी को सांझा कर आत्मा का
संतुष्टि प्रदान करने जैसा अनुभव रहा।
उन्होंने कहा कि यह वृद्ध आसमान से नहीं टपके हैं, यह हमारे समाज का अहम हिस्सा है।
लेकिन वक्त और हालातों के मारे हुए इन बुजुर्गों को यदि इनके अपनों ने सहारा नहीं दिया है और उम्र के इस पड़ाव में दर-दर की ठोकरें खाने पर मजबूर कर दिया है तो
शिक्षित और विवेकशील समाज का कर्तव्य बनता है कि इन लोगों को खुशी देने के लिए आगे आएं।
यह खुशी यदि साथ बैठकर दो बातें करने से मिलती हैं तो यह सर्वोपरी होगा, यदि समय अभाव हो तो इस वृद्धाश्रम के संचालन में दान भी किया जा सकता है।
वहीं बुजुर्गों के साथ शिक्षिका पूनम ने बाकायदा केक काटा और बुजुर्गों ने उन्हें अपने हाथों से केक खिलाया तथा जी भर के
आशीर्वाद दिया।
सभी बुजुर्गों ने खूब मस्ती की। संगीत की धुनों पर थिरकते बुजुर्गों का गम भले ही कुछ देर के लिए कम हुआ हो लेकिन सुखद यही है।
वहीं मानव सेवा ट्रस्ट सुंदरनगर के प्रवक्ता विजय कुमार ने बताया कि इस वृद्धाश्रम का संचालन सेवानिवृत एएसआई तथा अधिवक्ता प्रकाश बंसल अपने दम पर कर रहे हैं, हालांकि लोग भी इसमें सहयोग करते हैं लेकिन मंहगाई और बढ़ रही जरूरतों के इस दौर में यह सहयोग नाकाफी साबित हो रहा है।
वर्तमान में करीब 20 लोग इस आश्रम में रह रहे हैं। जिनका तमाम खर्च
ट्रस्ट और सहयोगियों द्वारा उठाया जा रहा है।
सरकार की ओर से अभी हाल ही में शुरू हुई सुखाश्रम योजना के तहत हर त्योहार में प्रति सदस्य 500 रूपया दिया जाता है। इसके अलावा किसी प्रकार की कोई मदद सरकार की ओर से
नहीं मिलती है।
बहरहाल शिक्षिका पूनम जैसी सोच यदि सभी की हो तो अपनों द्वारा दुत्कारे लोगों का रहन सहन और बेहतर हो सकता है।
