कुल्लू टुडे
बिलासपुर, कश्मीर ठाकुर
आदर्श रामलीला नाटक समिति घुमारवीं द्वारा आयोजित रामलीला के तीसरे दिन बाबा बालक नाथ कॉलेज चकमोह की प्रवक्ता सुकर्मा शर्मा अपने परिवारजनों के साथ मुख्यातिथि के रूप में उपस्थित हुईं।
इस अवसर पर उन्होंने घुमारवीं में रामलीला की परंपरा को पुनः आरंभ करने के प्रयासों की सराहना की और समिति के अध्यक्ष संजय शर्मा सहित सभी कलाकारों को बधाई एवं शुभकामनाएं दीं।
सुकर्मा शर्मा ने अपने संबोधन में घुमारवीं में रामलीला को आरंभ करवाने में अपने दिवंगत नाना सदानंद गौतम के योगदान को याद किया। उन्होंने कहा कि लगभग 28 वर्षों तक रामलीला बंद रहने के बाद इसे दोबारा शुरू करना एक सराहनीय कार्य है।
उन्होंने सभी रामभक्तों से मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के जीवन से प्रेरणा लेने, भाईचारे और आपसी प्रेम को बनाए रखने तथा धर्म और अधर्म के बीच अंतर समझकर सदैव धर्म के मार्ग पर चलने का आह्वान किया।
रामलीला के तीसरे दिन दर्शकों को विभिन्न महत्वपूर्ण प्रसंगों का मंचन देखने को मिला। प्रथम दृश्य में राक्षसों की खरमस्तियां और उनके अत्याचारों को दर्शाया गया।
इसके पश्चात राजा दशरथ के दरबार में ऋषि विश्वामित्र के आगमन और भगवान श्रीराम तथा लक्ष्मण को अपने साथ ले जाने की अनुमति मांगने का दृश्य प्रस्तुत किया गया। अगले दृश्य में ताड़का वध, सुबाहु वध और मारीच के भाग जाने के प्रसंगों का मंचन हुआ।
भगवान श्रीराम द्वारा राक्षसी ताड़का का वध और सुबाहु का संहार देखकर दर्शकों ने धर्म की विजय का संदेश ग्रहण किया। अंतिम प्रमुख दृश्य में सीता स्वयंवर का मंचन किया गया।
जिसमें राजा जनक के दरबार में विभिन्न राजाओं का आगमन, शिवधनुष को उठाने के प्रयास, रावण का प्रवेश तथा भगवान श्रीराम और लक्ष्मण की उपस्थिति ने दर्शकों का ध्यान आकर्षित किया। इसके साथ ही परशुराम के प्रवेश से जुड़ा दृश्य भी प्रस्तुत किया गया।
इस संध्या में राम की भूमिका में अभिषेक टेस्सू, लक्ष्मण भुवनेश गौतम, सीता विशाल शर्मा, राजा जनक अरविंद, रानी सुनैना जगरनाथ राणा, बांदी अंकू, विश्वामित्र देशराज, राजा दशरथ महंत राम, परशुराम शशि शर्मा, राजा काव्यांश, ज्योति शर्मा, विशिष्ठ नीरज शर्मा, राजा सुरेश धीमान, मंत्री केतन, रावण संजय शर्मा, मारीच मान सिंह, सुबाहु जोगिंदर सिंह और ताड़का की भूमिका में राजकुमार ठाकुर रॉकी ने दर्शकों को अंत तक बांधे रखा।
