कुल्लू टुडे
बिलासपुर,कश्मीर ठाकुर
भानुपल्ली-बिलासपुर-नोग बैरी बरमाना ब्रॉडगेज रेलवे लाइन के निर्माण के लिए भूमि अधिग्रहण को लेकर हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने 29 मार्च 2023 को जारी प्रारंभिक भूमि अधिग्रहण अधिसूचना को निरस्त कर दिया है।
कोर्ट ने माना कि निर्धारित 12 माह की अवधि के भीतर भूमि अधिग्रहण की आवश्यक घोषणा नहीं की गई और अवधि बढ़ाने के लिए जारी अधिसूचनाओं में कानून के मुताबिक पर्याप्त और स्पष्ट कारण दर्ज नहीं किए गए।
यह फैसला कुलदीप ठाकुर व अन्य बनाम हिमाचल प्रदेश सरकार व अन्य मामले में न्यायमूर्ति अजय मोहन गोयल और न्यायमूर्ति योगेश जसवाल की पीठ ने 29 सितंबर 2026 को सुनाया।
538 बीघा से अधिक भूमि के अधिग्रहण का था मामला
नोग से बरमाणा तक प्रस्तावित रेलवे परियोजना के लिए करीब 538 बीघा, 9 बिस्वा और 0.5 बिस्वांसी भूमि के अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू की गई थी।
इसमें नोग की 60.6 बीघा, बेहली चलेहड़ा की 4 बीघा, पराथू की 24.35 बीघा, बगड़ी की 22.9 बीघा, बैरी की 7 बिस्वा, खतेड़ की 210.2 बीघा, भटेड़ की 104.5 बीघा और बरमाणा की 91.8 बीघा भूमि शामिल थी।
याचिकाकर्ताओं के अनुसार, बिलासपुर सदर तहसील के ऊपरी भटेड़, बरमाणा और खतेड़ गांवों में कृषि भूमि तथा मकानों वाली जमीन को रेलवे लाइन के निर्माण के लिए अधिग्रहित किया जा रहा था।
याचिकाकर्ताओं ने भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास और पुनर्स्थापन में उचित प्रतिकर एवं पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम, 2013 की धारा 19(7) के तहत निर्धारित समयसीमा का पालन नहीं किए जाने का मुद्दा उठाया था।
अदालत ने पाया कि प्रारंभिक अधिसूचना 29 मार्च 2023 को जारी हुई थी, लेकिन इसके बाद निर्धारित 12 महीने के भीतर धारा 19(1) के तहत आवश्यक घोषणा नहीं की गई।
तीन बार बढ़ाई गई अवधि, फिर भी पूरी नहीं हुई प्रक्रिया
भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए सरकार की ओर से 16 मार्च 2024, 24 मार्च 2025 और 25 मार्च 2026 को अवधि बढ़ाने संबंधी अधिसूचनाएं जारी की गईं।
इसके बावजूद भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया निर्धारित अवधि में पूरी नहीं हो सकी। हाई कोर्ट ने इस मामले में अवधि बढ़ाने की प्रक्रिया और उसमें दर्ज कारणों की भी जांच की।
अदालत ने कहा कि धारा 19(7) के तहत 12 महीने की अवधि बढ़ाने से पहले सरकार को अपना निर्णय लिखित रूप में दर्ज करना था। साथ ही, अवधि बढ़ाने के कारणों को अधिसूचित करने और वेबसाइट पर अपलोड करने की कानूनी आवश्यकता भी थी।
अदालत के अनुसार, संबंधित रिकॉर्ड में ऐसा कोई ठोस और स्पष्ट कारण नहीं मिला, जिससे यह साबित हो सके कि अवधि बढ़ाने के लिए कानून में निर्धारित प्रक्रिया का सही तरीके से पालन किया गया।
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि केवल यह कहना कि पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन योजना “अनिवार्य प्रशासनिक परिस्थितियों” के कारण अंतिम रूप नहीं ले सकी, पर्याप्त नहीं है। ऐसी परिस्थितियों और वास्तविक बाधाओं का स्पष्ट विवरण सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज होना आवश्यक था।
2024, 2025 और 2026 की अवधि-विस्तार अधिसूचनाएं भी गलत
हाई कोर्ट ने माना कि धारा 19(7) के तीसरे प्रावधान का पालन नहीं किया गया। इसके चलते 29 मार्च 2023 की प्रारंभिक अधिसूचना कानून के तहत स्वतः निरस्त मानी गई।
अदालत ने इसके साथ ही वर्ष 2024, 2025 और 2026 में अवधि बढ़ाने के लिए जारी अधिसूचनाओं को भी कानूनन गलत ठहराया और याचिका स्वीकार कर ली।
हाई कोर्ट के इस फैसले से भानुपल्ली-बिलासपुर-बैरी रेलवे लाइन के लिए संबंधित क्षेत्रों में चल रही भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया पर सीधा असर पड़ा है।
अदालत का फैसला इस बात पर केंद्रित रहा कि भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया में निर्धारित समयसीमा और कानूनी प्रावधानों का पालन अनिवार्य है।
