कुल्लू टूडे
बिलासपुर, कश्मीर ठाकुर
चिकित्सकीय सेवा का क्षेत्र हर पग-पग पर परोपकार से भरा पड़ा है। ऐसे में यदि अपनी डूयटी कोे ईमानदारी से निभाया जाए तो लोग लंबे समय तक याद रखते हैं।
यह उदगार बिलासपुर जिला अस्पताल से मैट्रन पद से सेवानिवृत हुई सुनीता राणा ने कहे।
करीब साढ़े 35 साल की निर्विघ्न सेवाएं देकर सेवानिवृत होने पर अस्पताल प्रशासन की ओर से उन्हें भावभीनी विदाई दी।
इस समारोह में अस्पताल प्रशासन के चिकित्सकों के साथ प्रशासनिक अधिकारियों और रिश्तेदारों ने भाग लेकर समारोह को यादगार बनाया।
सुनीता राणा का मरीजों के प्रति सेवाभाव ही उनकी पहचान रही है। इन्होंने कभी भी किसी से कोई भेदभाव नहीं किया।
सही काम और मरीजों का दर्द देखते हुए चिकित्सकों, अधिकारियों या राजनीतिज्ञों से उलझने वाली सुनीता राणा ने जहां भी डयूटी की वहां उन्होंने बहुत कम समय में अपनी पहचान बना ली। इनकी प्रारंभिक शिक्षा बिलासपुर नगर के स्थानीय स्कूलों में हुई।
जबकि जिला अस्पताल बिलासपुर नर्सिंग कालेज से जीएनएम की पढ़ाई की और वर्ष 1990 में सरकारी सेवा में आईं। उन्होंने कांगड़ा के डाडासीबा से अपनी नौकरी की शुरूआत की।
उसके बाद बिलासपुर जिला अस्पताल, मारकंड के बाद पदोन्नत होकर वार्ड सिस्टर बने तथा आईजीएमसी में 2016 से लेकर 2021 तक सेवाएं प्रदान की।
शिमला आईजीएमसी में यदि उन्हें बिलासपुर का कोई भी व्यक्ति मिलता तो वह स्वयं आगे बढ़कर न सिर्फ उनकी सेवा करती रहीं बल्कि किसी प्रकार की परेशानी न हो, इसके लिए पूरा साथ देती।
आईजीएमसी शिमला के बाद वे बिलासपुर आई और बतौर मैट्रन पदभार संभाला। यहां भी उन्होंने दिन रात मानवता की सेवा के लिए अपना सर्वस्व होम किया। वर्ष 1994 सुनीता राणा राम लाल राणा से परिणय सूत्र में बंधी।
डा. राधाकृष्ण मेडीकल काॅलेज हमीरपुर से राम लाल राणा अधीक्षक ग्रेड-1 सेवानिवृत हुए हैं।
इनका एक बेटा एमबीबीएस की पढ़ाई कर चुका है जबकि बेटी बाॅटनी विषय में चंडीगढ़ से पीएचडी कर रही है।
समाज की सेवा के लिए सदैव तत्पर रहने वाले सुनीता राणा को विभिन्न समाजिक संस्थाओं के अलावा सरकार व प्रशासन द्वारा सम्मानित किया जा चुका है।
उन्होंने नगर अराध्य देव बाबा नाहर सिंह मंदिर परिसर में इस सेवानिवृति के अवसर पर प्रीतीभोज का आयोजन भी किया था।
जिसमें सैंकड़ों लोगों ने शिरकत कर उनकी सेवानिवृति पर मुबारकबाद देते हुए उनके उज्जवल भविष्य की कामना की।
